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लखनऊ अग्निकांड पर सियासी संग्राम! 15 मौतों के बाद डिप्टी सीएम ने किसे ठहराया जिम्मेदार, जानिए पूरा मामला

लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड के बाद यूपी की राजनीति गरमा गई है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने हादसे को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे प्रदेश में फायर सेफ्टी ऑडिट और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

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लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इस दर्दनाक हादसे में 15 लोगों की मौत के बाद अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस मामले को लेकर समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि वर्षों पहले हुई प्रशासनिक लापरवाही और अवैध निर्माण को मिले संरक्षण का परिणाम है। उनके अनुसार जिस इमारत में यह घटना हुई, उससे जुड़े कई फैसले पूर्ववर्ती सरकार के समय लिए गए थे, जिनकी अब जांच होनी चाहिए।

अवैध निर्माण और पुराने फैसलों पर उठे सवाल

डिप्टी सीएम ने दावा किया कि जिस भवन में आग लगी, उसका मूल नक्शा आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था, लेकिन बाद में वहां अन्य गतिविधियां संचालित होने लगीं। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण के दौरान कई नियमों की अनदेखी की गई और कार्रवाई की प्रक्रिया भी बीच में रोक दी गई। उनके मुताबिक, पहले भवन के खिलाफ कार्रवाई की गई थी, लेकिन बाद में कुछ फैसलों के चलते मामला आगे नहीं बढ़ पाया। इसी वजह से आज इतनी बड़ी त्रासदी देखने को मिली। हालांकि इन आरोपों पर विपक्ष की ओर से अलग राय सामने आ रही है और राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है।

सरकार का एक्शन मोड, जांच और कार्रवाई शुरू

हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत स्थिति की समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी। सरकार की ओर से मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। साथ ही शुरुआती स्तर पर कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि हादसे के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार का कहना है कि जांच के आधार पर आगे और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पीड़ित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने और राहत कार्यों की निगरानी भी लगातार की जा रही है।

पूरे प्रदेश में फायर सेफ्टी पर सख्ती

इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्यभर में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा शुरू कर दी है। सभी जिलों को फायर सेफ्टी ऑडिट अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने साफ किया है कि आवासीय भवनों में नियमों के विरुद्ध व्यावसायिक गतिविधियां संचालित नहीं होने दी जाएंगी। इसके अलावा बेसमेंट के उपयोग, फायर एनओसी, विद्युत सुरक्षा और आपातकालीन निकास व्यवस्था की भी जांच होगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए हैं कि लोगों को पहले नियमों के प्रति जागरूक किया जाए और उसके बाद उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। सरकार का लक्ष्य भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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