अयोध्या में राम मंदिर के प्रांगण में धर्म ध्वजा फहराए जाने को लेकर पाकिस्तान ने एक बार फिर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा कि यह कदम “मुस्लिम धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचाने” का प्रयास है। पाकिस्तान इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र तक पहुंच गया है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी आपत्ति दर्ज कराने की बात कही है।
बाबरी ढांचे को लेकर फिर दोहराया पुराना आरोप
अपने आधिकारिक बयान में पाकिस्तान ने यह भी दावा किया कि अयोध्या में मौजूद ढांचा ‘सदियों पुरानी मस्जिद’ था और वहां राम मंदिर का निर्माण तथा अब ध्वजारोहण “गंभीर चिंता” की बात है। पाकिस्तान ने 6 दिसंबर 1992 की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उस दिन की घटनाओं को नज़रअंदाज़ करके मंदिर निर्माण किया गया है। जबकि भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि यह पूरा मामला भारत के सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम और विस्तृत फैसले के आधार पर सुलझाया गया है।
भारत के फैसले और न्यायिक प्रक्रिया को किया नजरअंदाज
पाकिस्तान के बयान में भारतीय न्यायपालिका के फैसले या कानूनी प्रक्रिया का जिक्र नहीं किया गया है। 2019 में भारत के सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की सुनवाई के बाद विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ किया था और मुस्लिम पक्ष को कहीं और मस्जिद निर्माण के लिए भूमि देने का आदेश भी दिया था। भारत का तर्क है कि यह निर्णय पूरी तरह न्यायिक प्रक्रिया और ऐतिहासिक प्रमाणों पर आधारित है, किसी भी धार्मिक दबाव पर नहीं।
विशेषज्ञ बोले — पाकिस्तान का रुख राजनीतिक
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों के मुताबिक, पाकिस्तान द्वारा UN में यह मुद्दा उठाया जाना उसकी घरेलू राजनीति और धार्मिक भावनाओं को साधने की कोशिश हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के आंतरिक मामलों में बार-बार टिप्पणी करना पाकिस्तान की पुरानी नीति रही है, जबकि दोनों देशों के बीच ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर आतंरिक मामलों का सम्मान करने की आवश्यकता होती है। अयोध्या में ध्वजारोहण को लाखों श्रद्धालु मंदिर में नियमित परंपरा के हिस्से के रूप में देख रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय विवाद बनाने की कोशिश कर रहा है।
Read more-अयोध्या में ध्वजारोहण की खुशी काशी में भी गूंजी, 5000 दीपों से नहाया असि घाट
