जोधपुर में बुधवार को उस वक्त सियासी हलचल तेज हो गई, जब मनरेगा श्रमिकों के अधिकारों को लेकर निकली युवा कांग्रेस की पदयात्रा ने हाई वोल्टेज ड्रामे का रूप ले लिया। सोजती गेट से शुरू हुई ‘मनरेगा बचाव महासंग्राम’ यात्रा जब जिला कलेक्ट्रेट पहुंची, तो वहां पहले से ही पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड में था। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की मांग थी कि जिला कलेक्टर या अतिरिक्त कलेक्टर स्वयं बाहर आकर उनका ज्ञापन लें, ताकि आम श्रमिकों की समस्याएं सीधे शीर्ष प्रशासन तक पहुंच सकें। लेकिन प्रशासन की ओर से SDM पंकज जैन के पहुंचने पर विवाद ने तूल पकड़ लिया। यहीं से वह घटनाक्रम शुरू हुआ, जिसने पूरे जोधपुर में चर्चा का माहौल बना दिया और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गया।
ज्ञापन लेने पर अड़ी जिद, गुस्से में फाड़े कागज
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जैसे ही एसडीएम पंकज जैन ज्ञापन लेने के लिए आगे आए, कांग्रेस नेताओं ने आपत्ति जताई और कहा कि वे गेट के भीतर नहीं बल्कि बाहर कार्यकर्ताओं के बीच आकर ज्ञापन लें। इसी बात पर बहस तेज होती चली गई। माहौल गरमाने पर कांग्रेस विधायक अभिमन्यु पूनिया अचानक आगबबूला हो गए। गुस्से में उन्होंने ज्ञापन के पन्ने फाड़ दिए और एसडीएम की ओर हवा में उछाल दिए। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के मोबाइल कैमरों में कैद हो गया और कुछ ही देर में वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस हरकत के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में तनाव की स्थिति बन गई और पुलिस को बीच-बचाव करना पड़ा।
प्रशासन पर गंभीर आरोप, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
घटना के बाद विधायक अभिमन्यु पूनिया ने प्रशासन पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि जिला प्रशासन जनप्रतिनिधियों और आम जनता से दूरी बना रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कलेक्टर और अतिरिक्त कलेक्टर बाहर आकर ज्ञापन नहीं लेते, तो गरीब मनरेगा श्रमिक अपनी बात किससे कहें। विधायक ने दावा किया कि मनरेगा मजदूरों को समय पर काम और मजदूरी नहीं मिल रही, लेकिन प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि श्रमिकों के अधिकारों की अनदेखी जारी रही, तो कांग्रेस आंदोलन को और उग्र करेगी। इस दौरान नारेबाजी हुई और कुछ समय के लिए कलेक्ट्रेट परिसर में अफरा-तफरी का माहौल रहा।
राजनीतिक बयानबाजी तेज, जोधपुर की छवि पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में पूर्व मंत्री राजेंद्र चौधरी, भोपालगढ़ विधायक गीता बरवड़ सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता मौजूद रहे। ज्ञापन फाड़े जाने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच भी तीखी बहस देखने को मिली। वहीं, प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा और व्यवस्था को देखते हुए एसडीएम को ज्ञापन लेने भेजा गया था, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने जानबूझकर विवाद खड़ा किया। राजनीतिक गलियारों में अब इस घटना को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। कुछ लोग इसे जनहित का मुद्दा बता रहे हैं, तो कुछ इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बता रहे हैं। जोधपुर, जिसे शांति और अपनायत के लिए जाना जाता है, वहां इस तरह का सियासी टकराव शहर की छवि पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
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