लखनऊ की बेटी मेनका सोनी ने अमेरिकी राजनीति में नया इतिहास रच दिया है। उन्हें वॉशिंगटन राज्य के रेडमंड शहर की सिटी काउंसिल में चुना गया है। यह उपाधि उन्हें इस शहर की पहली भारतीय-अमेरिकी महिला काउंसलर बनाती है। अपने चुनावी सफर के दौरान मेनका ने समाज और शिक्षा से जुड़ी कई महत्वपूर्ण पहलों का नेतृत्व किया, जिसके कारण उनकी लोकप्रियता और भरोसा लगातार बढ़ा। यह सफलता केवल उनके लिए नहीं बल्कि भारत और भारतीय प्रवासियों के लिए गर्व का पल साबित हुआ।
शपथ लेने का खास अंदाज
मेरेका सोनी ने अपने पद की शपथ लेने का तरीका भारतीय संस्कृति और विरासत का प्रतीक बना। उन्होंने श्रीमद्भगवद गीता हाथ में लेकर शपथ ली। यह क्षण भारतीय समुदाय के लिए गर्व का रहा क्योंकि इससे भारतीय परंपराओं और मूल्यों का सम्मान भी हुआ। शपथ ग्रहण समारोह में उन्होंने पारंपरिक भारतीय हैंड-एम्ब्रॉयडरी वाली पैंट-सूट पहन रखी थी। जज रसेल ने उन्हें आधिकारिक रूप से पद की शपथ दिलाई और उनकी सफलता को प्रशंसा के साथ स्वीकार किया।
सिटी काउंसिल में उनके लक्ष्य और भूमिका
मेनका सोनी का मुख्य उद्देश्य रेडमंड शहर में शिक्षा, समाज सेवा और सामुदायिक विकास को आगे बढ़ाना है। उनके अनुसार, महिला सशक्तिकरण और प्रवासी भारतीयों की भागीदारी को बढ़ावा देना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। सिटी काउंसिल में शामिल होने के बाद वह शहर की नीतियों और योजनाओं में अधिक सक्रिय भूमिका निभाएंगी। उनका कहना है कि विविध समुदायों का समावेश और सभी नागरिकों के हित में निर्णय लेना उनकी जिम्मेदारी है।
भारतीय संस्कृति का वैश्विक पहचान
मेनका सोनी की शपथ और उनके चुनाव ने यह साबित कर दिया कि भारतीय संस्कृति और परंपरा दुनिया के किसी भी कोने में सम्मानित और प्रेरक बन सकती है। रेडमंड में उनका यह सफर भारतीय मूल के लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि उनके लिए यह केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि भारतीय विरासत की वैश्विक मान्यता का प्रतीक है। उनकी यह उपलब्धि नई पीढ़ी के लिए भी प्रेरणा बनेगी, जो विदेशों में रहते हुए भी अपनी जड़ों और संस्कृति को बनाए रखना चाहते हैं।
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