कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र के रौतापुर गांव में बीते 49 दिनों से पसरा सन्नाटा तब चीख में बदल गया, जब शिवराजपुर के शाह निवादा के जंगलों से एक नरकंकाल बरामद हुआ। यह कंकाल 35 वर्षीय अविवाहित युवक गोरेलाल का था, जो बीती 31 अक्टूबर की रात से अचानक लापता हो गया था। परिजनों ने 2 नवंबर को गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस के हाथ खाली थे। गोरेलाल का मोबाइल स्विच ऑफ था और गांव में तरह-तरह की चर्चाएं आम थीं। किसी को अंदाजा नहीं था कि जिस शख्स को वे ढूंढ रहे हैं, उसकी हत्या उसके ही अपनों ने कर दी है। पुलिस ने जब सर्विलांस और मुखबिरों के जाल को कसा, तब कड़ियां जुड़नी शुरू हुईं और शक की सुई गांव की ही एक महिला की ओर मुड़ी, जिसके साथ गोरेलाल के चार साल पुराने प्रेम संबंध थे।
इश्क, विश्वासघात और ममता का रौद्र रूप
जैसे ही पुलिस ने गोरेलाल की प्रेमिका को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, वह टूट गई और उसने जो राज उगला उसे सुनकर पुलिसकर्मियों के भी पैरों तले जमीन खिसक गई। महिला ने बताया कि गोरेलाल का उसके घर आना-जाना था, लेकिन धीरे-धीरे उसकी नीयत बदल गई थी। आरोपी महिला के अनुसार, गोरेलाल उसकी 13 साल की मासूम बेटी पर बुरी नजर रखने लगा था। वह न केवल किशोरी के साथ अवैध संबंध बनाने का दबाव डाल रहा था, बल्कि विरोध करने पर महिला के इकलौते बेटे को जान से मारने की धमकी भी देता था। एक मां के लिए यह स्थिति असहनीय हो गई थी। प्रेमी के बढ़ते जुल्म और अपनी संतान की सुरक्षा के लिए उसने प्रेम को किनारे कर ‘ममता का चंडी रूप’ धारण कर लिया और गोरेलाल को रास्ते से हटाने का खौफनाक प्लान तैयार किया।
शराब की दावत और मौत का बिछाया गया जाल
हत्या की पटकथा बड़ी ही चालाकी से रची गई थी। 31 अक्टूबर की काली रात को महिला ने गोरेलाल को झांसा दिया कि वह उसकी शादी कहीं और करवा देगी। इसी बहाने वह उसे अपने मायके ले गई। वहां उसने अपने भतीजे को पहले ही विश्वास में ले रखा था। योजना के मुताबिक, पहले गोरेलाल को जी भरकर शराब पिलाई गई। जब वह पूरी तरह नशे में धुत होकर अपने होश खो बैठा, तब महिला और उसके भतीजे ने मिलकर गला दबाकर उसे मौत की नींद सुला दिया। सबूत मिटाने के इरादे से उन्होंने शव को शिवराजपुर के घने जंगलों में ले जाकर फेंक दिया, ताकि जंगली जानवर उसे खा जाएं और कोई सुराग न बचे। अगले 49 दिनों तक आरोपी बिल्कुल सामान्य बने रहे, जैसे उन्हें कुछ पता ही न हो।
खाकी का शिकंजा और न्याय की ओर बढ़ते कदम
कानपुर पुलिस की तफ्तीश में मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल्स सबसे अहम कड़ी साबित हुए। महिला की निशानदेही पर जब पुलिस टीम जंगल पहुंची, तो वहां केवल गोरेलाल के कपड़ों के अवशेष और कंकाल ही शेष बचा था। पुलिस ने महिला और उसके भतीजे को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। गांव में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है कि कैसे एक अवैध संबंध का अंत इतनी वीभत्स हत्या के रूप में हुआ। हालांकि महिला ने अपनी सफाई में बेटी की सुरक्षा का हवाला दिया है, लेकिन कानूनन हाथ में कानून लेना उसे भारी पड़ गया। पुलिस अब कंकाल का डीएनए टेस्ट कराने की तैयारी कर रही है ताकि कोर्ट में ठोस सबूत पेश किए जा सकें और अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके।
