Monday, February 2, 2026
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उन्नाव रेप केस में उम्रकैद पर रोक, कुलदीप सेंगर को बेल… निर्भया की मां बोलीं—‘कोर्ट खुद ही मजाक बना रहा है!’

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उन्नाव रेप कांड एक बार फिर देश की सुर्खियों में है। साल 2017 के इस चर्चित मामले में सजा काट रहे पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट से जमानत मिल गई है। अदालत ने उम्रकैद की सजा पर रोक लगाते हुए यह राहत दी, जिसके बाद सामाजिक और कानूनी हलकों में बहस तेज हो गई है। इस फैसले पर निर्भया की मां आशा देवी ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि ऐसे मामलों में बेल का आधार क्या हो सकता है। उनके अनुसार, अपराध कितना गंभीर है, यह सबसे बड़ा मुद्दा होना चाहिए, न कि आरोपी कहां रहेगा या कितनी दूरी बनाए रखेगा। आशा देवी ने यह भी कहा कि इस तरह के फैसले न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं और समाज को गलत संदेश देते हैं।

पीड़ित परिवार की सुरक्षा पर गहराया संकट

आशा देवी ने साफ शब्दों में कहा कि कोर्ट को पीड़ित और उसके परिवार की स्थिति को सबसे पहले देखना चाहिए। उन्होंने बताया कि उन्नाव रेप केस की पीड़िता का परिवार आज भी डर के साए में जी रहा है। परिवार के सदस्यों का कहना है कि उनकी छोटी बच्चियों को स्कूल भेजना तक सुरक्षित नहीं है। वे लगातार सुरक्षा घेरे में रहने को मजबूर हैं और सामान्य जीवन नहीं जी पा रहे। ऐसे में आरोपी को बेल मिलना उनके लिए और बड़ा खतरा बन सकता है। आशा देवी ने सरकार और अदालत से अपील की कि सजा पर रोक लगाने जैसे फैसलों पर दोबारा गंभीरता से विचार होना चाहिए, ताकि पीड़ित परिवार को यह भरोसा मिल सके कि कानून उनके साथ खड़ा है।

‘नया नियम बन रहा है’ कहकर जताई नाराजगी

निर्भया की मां ने यह भी कहा कि इस तरह से सजा सस्पेंड करना एक खतरनाक परंपरा की शुरुआत हो सकती है। उनका कहना है कि अगर गंभीर अपराधों में दोषी ठहराए गए लोगों को इस आधार पर राहत मिलने लगेगी, तो बाकी कैदी भी इसी तरह की मांग करेंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब निचली अदालत और हाई कोर्ट में सुनवाई के बाद सजा तय होती है, तो फिर बार-बार फैसलों को पलटने का क्या मतलब रह जाता है। आशा देवी ने तीखे शब्दों में कहा कि अगर आखिर में सब कुछ बदलना ही है, तो फिर निचली अदालतों में सुनवाई कर समय और संसाधन क्यों खर्च किए जाते हैं। उनके मुताबिक, इससे न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता कमजोर होती है।

पीड़िता की बहन का दर्द

इस मामले पर पीड़िता की बहन ने भी गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि आरोपी की रिहाई से वह खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रही हैं। उनके अनुसार, उनके परिवार ने पहले ही कई अपूरणीय नुकसान झेले हैं और अब यह फैसला उनके जख्मों को फिर से हरा कर रहा है। गौरतलब है कि 2017 में उन्नाव की एक नाबालिग ने कुलदीप सिंह सेंगर पर अपहरण और बलात्कार का आरोप लगाया था। बाद में यह मामला हाई प्रोफाइल बन गया और सुरक्षा कारणों से केस को दिल्ली ट्रांसफर किया गया। ट्रायल के बाद सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। अब दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा सजा पर रोक और जमानत दिए जाने से एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या पीड़ितों को न्याय मिलने की राह अब भी उतनी ही कठिन है।

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