आर्थिक तंगी जब इंसान के सब्र की सीमा तोड़ देती है, तब कई बार सही-गलत का फर्क भी धुंधला पड़ जाता है। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से सामने आया यह मामला भी कुछ ऐसा ही है, जहां पैसों की किल्लत और लगातार बढ़ते कर्ज ने एक पति-पत्नी को अपराध की राह पर धकेल दिया। अरुण कुमार तुरंग और उसकी पत्नी राखी तुरंग गांव में सामान्य जीवन जी रहे थे, लेकिन कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा था। रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया था। इसी दबाव में दोनों ने जल्दी पैसा कमाने का शॉर्टकट तलाशना शुरू किया। यहीं से उनकी जिंदगी ने खतरनाक मोड़ ले लिया। इंटरनेट पर समाधान खोजते-खोजते दोनों यूट्यूब तक पहुंच गए, जहां नकली नोट छापने से जुड़े वीडियो उपलब्ध थे। इन वीडियो ने उन्हें यह भरोसा दिला दिया कि थोड़े से साधनों के सहारे घर बैठे फेक करेंसी तैयार की जा सकती है। यही भरोसा आगे चलकर उनके लिए जेल की सलाखों तक पहुंचने की वजह बन गया।
यूट्यूब बना गुरु, ऑनलाइन प्रिंटर से शुरू हुआ खेल
अरुण और राखी ने यूट्यूब पर कई वीडियो देखे, जिनमें नकली नोट छापने की तकनीक बताई जा रही थी। वीडियो देखकर दोनों को लगा कि यह काम ज्यादा मुश्किल नहीं है। इसके बाद उन्होंने ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म से एक कलर प्रिंटर मंगाया, साथ ही कागज और अन्य जरूरी सामान भी जुटा लिया। घर के एक कमरे को उन्होंने अस्थायी “प्रिंटिंग रूम” में बदल दिया। यहां 100, 200 और 500 रुपये के नोट छापे जाने लगे। हालांकि ये नोट असली जैसे तो नहीं थे, लेकिन दूर से देखने पर सामान्य लोगों को धोखा देने लायक जरूर थे। दोनों का प्लान था कि गांव और आसपास के साप्ताहिक बाजारों में छोटी-छोटी खरीदारी कर इन नोटों को चला दिया जाए, ताकि किसी को शक न हो। शुरुआत में उन्हें लगा कि उनका तरीका काम कर रहा है और नोट आसानी से खप रहे हैं। यही आत्मविश्वास धीरे-धीरे उनकी सबसे बड़ी कमजोरी बन गया।
साप्ताहिक बाजार में खुला राज
पूरा मामला उस वक्त सामने आया जब थाना रानीतराई क्षेत्र के एक साप्ताहिक बाजार में अचानक नकली नोट चलने की शिकायतें मिलने लगीं। सब्जी बेचने वाले तुलेश्वर सोनकर ने पुलिस को बताया कि एक पुरुष और महिला ने उससे 60 रुपये की सब्जी खरीदी और बदले में 500 रुपये का नोट दिया। बाद में जब बाजार में अन्य दुकानदारों ने नकली नोट मिलने की बात कही, तो उसने अपने गल्ले की जांच की। जांच में एक नोट संदिग्ध लगा, जिसके बाद उसने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और बाजार में मौजूद संदिग्ध लोगों पर नजर रखनी शुरू की। इसी दौरान अरुण और राखी पुलिस को असहज व्यवहार करते दिखे। तलाशी लेने पर उनके पास से नकली नोट बरामद हुए। पूछताछ में अरुण टूट गया और उसने पूरा जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि आर्थिक संकट के चलते उसने यह रास्ता चुना और उसकी पत्नी भी इसमें बराबर की साझेदार थी।
घर से मिली फेक करेंसी, अब सलाखों के पीछे
बाजार में गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने दोनों के घर पर छापा मारा। आरोपी दंपति ग्राम सोनपैरी, मुजगहन जिला रायपुर के रहने वाले हैं। घर की तलाशी में पुलिस को वही कलर प्रिंटर मिला, जिससे नकली नोट छापे जा रहे थे। इसके साथ ही बड़ी मात्रा में कागज और करीब 1 लाख 70 हजार 500 रुपये की फेक करेंसी बरामद हुई। इनमें 100, 200 और 500 रुपये के नकली नोट शामिल थे। पुलिस के मुताबिक इनमें से कुछ नोट पहले ही बाजार में चलाए जा चुके थे, जबकि बाकी नोट आगे खपाने की तैयारी थी। जांच में यह भी सामने आया कि अरुण पहले चोरी के एक मामले में जेल जा चुका है। पुलिस ने दोनों के खिलाफ नकली करेंसी छापने और चलाने का मामला दर्ज कर लिया है। अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है कि कहीं इसमें और लोग तो शामिल नहीं हैं। यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि इंटरनेट से मिली गलत जानकारी कैसे आम लोगों को अपराध की दुनिया में धकेल सकती है।
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