Thursday, February 12, 2026
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बरेली की आशिया कैसे बनी अंशिका? मेले में हुई मुलाकात से मंदिर में मुस्लिम युवती ने हिंदू लड़के के साथ लिए सात फेरों

उत्तर प्रदेश के बरेली में मुस्लिम युवती आशिया ने हिंदू प्रेमी मोनू से मंदिर में वैदिक रीति से विवाह किया। सनातन धर्म अपनाकर नाम अंशिका रखने वाली युवती ने अपने फैसले और कारण खुद बताए। पढ़ें पूरी खबर।

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उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से एक ऐसी प्रेम कहानी सामने आई है, जिसने स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा बटोरी है। बरेली की रहने वाली मुस्लिम युवती आशिया की मुलाकात करीब चार साल पहले भोजीपुरा क्षेत्र में आयोजित एक मेले के दौरान मोनू नाम के युवक से हुई थी। उस वक्त आशिया अपनी बहन के घर आई हुई थीं और यूं ही मेला घूमने चली गई थीं। वहीं पहली बार मोनू से आमना-सामना हुआ। बातचीत शुरू हुई, नंबरों का आदान-प्रदान हुआ और धीरे-धीरे दोनों के बीच दोस्ती गहरी होती चली गई। आशिया के मुताबिक, समय के साथ यह दोस्ती प्यार में बदल गई। दोनों ने एक-दूसरे को समझने में समय लिया और फिर भविष्य को लेकर गंभीर बातचीत शुरू की। चार साल के रिश्ते के बाद दोनों ने साथ जीवन बिताने का फैसला किया, जो अब मंदिर में विवाह के रूप में सामने आया है।

सनातन धर्म अपनाने का फैसला और अंशिका बनने की कहानी

शादी के साथ ही आशिया ने सनातन धर्म अपनाने का फैसला किया और अपना नया नाम अंशिका रखा। अंशिका ने बताया कि वह पिछले कुछ वर्षों से सनातन परंपराओं से प्रभावित थीं और नियमित रूप से मंदिर भी जाया करती थीं। उनका कहना है कि मोनू से मिलने के बाद उन्हें हिंदू रीति-रिवाजों को और करीब से जानने और समझने का मौका मिला। अंशिका ने साफ शब्दों में कहा कि यह फैसला पूरी तरह उनका निजी और स्वेच्छिक है। उन्होंने इस्लाम छोड़ने के पीछे अपने कारण भी बताए और कहा कि तीन तलाक, हलाला और हिजाब जैसी प्रथाएं उन्हें पसंद नहीं थीं। उनके अनुसार, वह अपनी जिंदगी स्वतंत्र रूप से और अपने निर्णय खुद लेकर जीना चाहती हैं। अंशिका ने यह भी कहा कि धर्म परिवर्तन किसी दबाव में नहीं, बल्कि आत्मिक संतोष और विश्वास के आधार पर किया गया है।

मंदिर में वैदिक मंत्रों के बीच हुआ विवाह

अंशिका और मोनू की शादी बरेली स्थित अगस्त मुनि आश्रम में कराई गई। आश्रम के महंत पंडित केके शंखधार ने बताया कि विवाह से पहले युवक और युवती की ओर से सभी जरूरी कागजी औपचारिकताएं पूरी की गईं। इसके बाद युवती का शुद्धिकरण और घर वापसी की प्रक्रिया संपन्न कराई गई और फिर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मंदिर में सात फेरे कराए गए। पंडित केके शंखधार के अनुसार, यह विवाह पूरी तरह से कानून के दायरे में और युवती की सहमति से कराया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी तरह का दबाव या जबरदस्ती नहीं थी। शादी के दौरान सीमित संख्या में लोग मौजूद रहे और पूरे कार्यक्रम को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया गया। मंदिर में हुए इस विवाह की तस्वीरें और खबर अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

परिवार, उम्र और अपने फैसले पर अडिग अंशिका

अंशिका ने बताया कि वह थाना मीरगंज क्षेत्र की रहने वाली हैं और उनके परिवार में चार भाई और दो बहनें हैं। कुल छह भाई-बहनों में वह भी एक हैं और उनकी उम्र 20 वर्ष है। उन्होंने कहा कि वह बालिग हैं और अपने फैसले खुद लेने में सक्षम हैं। अंशिका के अनुसार, मोनू से पहली मुलाकात के बाद दोनों के बीच लगातार बातचीत होती रही और एक समय ऐसा आया जब मोनू ने अपने दिल की बात कह दी। इसके बाद दोनों ने आपसी सहमति से शादी का निर्णय लिया। अंशिका ने दो टूक कहा कि वह किसी तरह के दबाव में नहीं हैं और अपनी मर्जी से यह कदम उठाया है। उनका कहना है कि वह अपने भविष्य को लेकर आश्वस्त हैं और अपने फैसले पर पूरी तरह कायम हैं। बरेली की यह घटना एक बार फिर प्रेम विवाह, धर्म परिवर्तन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ले आई है।

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