उत्तर प्रदेश का संभल जिला एक बार फिर प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सुर्खियों में आ गया है। शाही जामा मस्जिद के पास स्थित लगभग 8 बीघा कब्रिस्तान की नापजोख करने के लिए राजस्व विभाग की टीम मैदान में उतरने जा रही है। यह नापजोख केवल जमीन की माप तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके बाद संभावित रूप से अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई भी की जा सकती है। जिला प्रशासन के मुताबिक, लंबे समय से कब्रिस्तान की जमीन को लेकर सीमाओं को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई थी, जिसकी शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर अब राजस्व अभिलेखों के अनुसार जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में रहकर की जाएगी और किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का इरादा नहीं है, लेकिन सरकारी भूमि से अवैध कब्जा हटाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
शाही जामा मस्जिद के कारण क्यों है मामला संवेदनशील?
जिस स्थान पर नापजोख और कार्रवाई होनी है, वह संभल की ऐतिहासिक शाही जामा मस्जिद के बेहद करीब स्थित है। यही वजह है कि यह मामला प्रशासन के लिए बेहद संवेदनशील बन गया है। शाही जामा मस्जिद न सिर्फ धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि बड़ी संख्या में लोगों की आस्था से भी जुड़ी हुई है। प्रशासन को आशंका है कि किसी भी तरह की गलतफहमी या अफवाह से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि कार्रवाई पूरी तरह तकनीकी और रिकॉर्ड आधारित होगी। स्थानीय लोगों से भी शांति बनाए रखने की अपील की गई है। अधिकारियों का कहना है कि नापजोख का उद्देश्य किसी विशेष स्थल या समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि जमीन के सही सीमांकन को स्पष्ट करना है ताकि भविष्य में किसी भी तरह का विवाद न रहे।
पुलिस और RRF की तैनाती, ड्रोन से नजर
कार्रवाई को लेकर सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं। संभल में शाही जामा मस्जिद और कब्रिस्तान क्षेत्र को पूरी तरह छावनी में तब्दील कर दिया गया है। ASP (नॉर्थ) कुलदीप सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि मौके पर 9 थाना प्रभारी (SHO), 3 इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी, PAC की एक कंपनी और रैपिड रिस्पॉन्स फोर्स (RRF) की एक कंपनी तैनात की गई है। इसके अलावा ड्रोन कैमरों से पूरे इलाके की निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति पर तुरंत काबू पाया जा सके। पुलिस बल को साफ निर्देश दिए गए हैं कि कानून-व्यवस्था से किसी भी तरह का समझौता न हो। प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि नापजोख और संभावित अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो और आम नागरिकों को किसी तरह की परेशानी न हो।
अवैध कब्जों पर प्रशासन का रुख
राजस्व विभाग की नापजोख पूरी होने के बाद जिला प्रशासन अपनी अगली रणनीति तय करेगा। यदि नापजोख में यह स्पष्ट होता है कि कब्रिस्तान की जमीन पर अवैध कब्जे किए गए हैं, तो प्रशासन नियमानुसार नोटिस जारी कर कार्रवाई करेगा। अधिकारियों के मुताबिक, पहले संबंधित पक्षों को दस्तावेज पेश करने का मौका दिया जाएगा, उसके बाद ही किसी तरह की हटाने की प्रक्रिया शुरू होगी। प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई पूरी तरह पारदर्शी होगी और किसी भी स्तर पर मनमानी नहीं की जाएगी। संभल प्रशासन यह भी चाहता है कि इस कार्रवाई से भविष्य में जमीन से जुड़े विवादों पर पूर्ण विराम लगे। फिलहाल पूरे जिले की नजर इस नापजोख पर टिकी हुई है, क्योंकि शाही जामा मस्जिद के पास होने वाली यह कार्रवाई आने वाले दिनों में बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक संदेश भी दे सकती है।
