संभल हिंसा FIR मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। उत्तर प्रदेश के संभल जिले में 24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भड़की हिंसा को लेकर अब अदालत ने बड़ा कदम उठाया है। संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट ने पूर्व CO अनुज चौधरी, पूर्व कोतवाल अनुज तोमर समेत 15-16 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किशोर आलम के गोली लगने से घायल होने के मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। इस आदेश के बाद संभल कोतवाली पुलिस को FIR दर्ज कर पूरे मामले की जांच करनी होगी। यह फैसला ऐसे समय आया है जब संभल हिंसा FIR मामला पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बना हुआ है।
किशोर के घायल होने का आरोप
संभल हिंसा FIR मामले की जड़ उस घटना से जुड़ी है, जब जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया था। हिंसा के दौरान गोली लगने से आलम नाम का एक किशोर घायल हो गया था। आरोप है कि यह गोली पुलिस फायरिंग में लगी। किशोर के पिता यामीन ने इस घटना को गंभीर बताते हुए स्थानीय पुलिस अधिकारियों पर सीधा आरोप लगाया था। शुरुआत में जब उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया। यामीन की याचिका पर सुनवाई करते हुए CJM कोर्ट ने प्रथम दृष्टया जांच की जरूरत बताई और FIR दर्ज करने के आदेश दिए। कोर्ट का मानना है कि संभल हिंसा FIR मामला केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सच्चाई सामने लाने के लिए कानूनी प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए।
अनुज चौधरी का प्रमोशन और विवाद का नया मोड़
संभल हिंसा FIR मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जिन पूर्व CO अनुज चौधरी पर FIR के आदेश हुए हैं, उन्हें हाल ही में प्रमोशन मिला है। यूपी सरकार ने उन्हें एडिशनल एसपी (ASP) पद पर पदोन्नत किया है। अनुज चौधरी 2012 बैच के PPS अधिकारी हैं और स्पोर्ट्स कोटे से ASP बनने वाले पहले अधिकारी माने जा रहे हैं। प्रमोशन के बाद उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अशोक स्तंभ लगाकर सम्मानित भी किया गया। लेकिन इसी बीच FIR के आदेश आने से मामला और संवेदनशील हो गया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या प्रमोशन के बावजूद जांच निष्पक्ष रह पाएगी। संभल हिंसा FIR मामला अब सिर्फ कानून व्यवस्था का नहीं, बल्कि सिस्टम की पारदर्शिता से भी जुड़ गया है।
पहलवान से पुलिस अफसर तक: अनुज चौधरी की पूरी प्रोफाइल
संभल हिंसा FIR मामला चर्चा में आने के साथ ही अनुज चौधरी की प्रोफाइल भी लोगों के बीच तेजी से वायरल हो रही है। मूल रूप से मुजफ्फरनगर के बहेड़ी गांव के रहने वाले अनुज चौधरी पुलिस सेवा में आने से पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवान रह चुके हैं। उन्होंने 1997 से 2014 तक राष्ट्रीय चैंपियनशिप में लगातार हिस्सा लिया। 2002 और 2010 के नेशनल गेम्स में रजत पदक, 2005 से 2009 तक एशियाई चैंपियनशिप में पदक और 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में भी रजत पदक जीत चुके हैं। उन्होंने 2004 एथेंस ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया। तेजतर्रार छवि और सख्त बयानों के लिए पहचाने जाने वाले अनुज चौधरी ने संभल में हिंसा के दौरान कड़ी कार्रवाई की थी। अब जब संभल हिंसा FIR मामला अदालत के आदेश तक पहुंच चुका है, तो उनकी भूमिका की जांच होना तय माना जा रहा है।
