क्रिकेटर विराट कोहली के वृंदावन दौरे को लेकर दिया गया बयान अब फलाहारी बाबा के लिए मुश्किल बन गया है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा उर्फ फलाहारी बाबा ने संत प्रेमानंद महाराज और उनके अनुयायियों से माफी मांगी है। विवाद उस दावे के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि विराट कोहली को प्रेमानंद महाराज के आश्रम तक लाने के लिए एक निजी कंपनी ने पांच करोड़ रुपये खर्च किए थे। बयान को लेकर धार्मिक जगत में नाराजगी बढ़ी और मामला चर्चा में आ गया। इसके बाद फलाहारी बाबा ने हाथ जोड़कर क्षमा मांगी और कहा कि उनकी बातों से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह इसके लिए माफी चाहते हैं।
संतों की बैठक में बहिष्कार का फैसला, बढ़ा विवाद
फलाहारी बाबा के बयान पर मथुरा-वृंदावन के संत समाज ने नाराजगी जताई थी। खबरों के मुताबिक, सिद्ध पीठ हनुमान टेकरी पर संतों की बैठक हुई, जिसमें उनके बहिष्कार और भविष्य में धार्मिक मंचों पर आमंत्रित नहीं करने का फैसला लिया गया। इस घटनाक्रम के बाद विवाद ने और तूल पकड़ लिया। फलाहारी बाबा ने अपनी सफाई में कहा कि उन्होंने प्रेमानंद महाराज के खिलाफ गलत टिप्पणी नहीं की थी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उनके शब्दों से महाराज के भक्तों या किसी सनातनी को दुख पहुंचा हो तो वे क्षमा चाहते हैं। उन्होंने प्रेमानंद महाराज को हिंदू समाज का गौरव बताया। उनके माफीनामे के बाद अब इस विवाद को लेकर संत समाज की अगली प्रतिक्रिया पर नजर है।
फलाहारी बाबा का दावा- मिल रही हैं जान से मारने की धमकियां
माफी मांगने के साथ फलाहारी बाबा ने यह भी दावा किया कि विवाद सामने आने के बाद उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। हालांकि, इन धमकियों के संबंध में स्वतंत्र पुष्टि या किसी आधिकारिक कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। विराट कोहली के वृंदावन आने और आश्रम से जुड़े खर्च को लेकर किया गया उनका दावा भी अपने आप में प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। ऐसे में इस पूरे मामले में आरोप, सफाई और प्रमाणित जानकारी के बीच अंतर समझना जरूरी है। फिलहाल फलाहारी बाबा के बयान और उनकी माफी ने धार्मिक और सोशल मीडिया जगत में नई बहस छेड़ दी है।
प्रेमानंद महाराज के आश्रम में भीड़
इस विवाद के बीच संत प्रेमानंद महाराज का आश्रम भी हाल के दिनों में एक अलग घटना के कारण चर्चा में रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अपने शिष्य रसिक दुलारी की मौत के करीब दो सप्ताह बाद महाराज राधा केलि कुंज आश्रम पहुंचे, जहां उनके दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त जुटे। शिष्य की मौत के मामले में बताया गया कि पुलिस सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। घटना से जुड़े कुछ असामान्य तथ्यों को लेकर सवाल उठे हैं, लेकिन मौत से पहले की परिस्थितियों और अन्य पहलुओं पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल फलाहारी बाबा की माफी और आश्रम से जुड़े घटनाक्रम दोनों ही चर्चा में हैं।
Read More-किस महिला ने चूमा अभिजीत दीपके का माथा? भावुक हो गए CJP के संस्थापक
