उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार 17 जनवरी 2026 को अचानक वाराणसी पहुंचे, जहां उनके दौरे को मणिकर्णिका घाट को लेकर चल रहे सियासी विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। वाराणसी पहुंचते ही मुख्यमंत्री सबसे पहले विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे और भगवान शिव का विधिवत अभिषेक कर पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने काल भैरव मंदिर में दर्शन-पूजन किया। मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल धार्मिक नहीं बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मणिकर्णिका घाट पर चल रहे प्रोजेक्ट को लेकर विपक्षी दलों और कुछ संगठनों द्वारा लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं, ऐसे में योगी आदित्यनाथ का वाराणसी पहुंचकर सीधे संदेश देना कई मायनों में अहम है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संकेत दिए कि सरकार काशी की परंपरा, विरासत और आस्था के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी। उनका यह दौरा आने वाले दिनों में चल रही बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर सकता है।
काशी की पहचान और विकास: योगी का बड़ा बयान
काशी विश्वनाथ और काल भैरव मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मीडिया से बातचीत में काशी को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि काशी अविनाशी है और हर सनातनी के मन में काशी के प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव रहता है। योगी ने कहा कि आज काशी को पूरी दुनिया में एक नई पहचान मिली है और यह पहचान पिछले 11 वर्षों में हुए विकास कार्यों की देन है। उन्होंने कहा कि काशी का प्रतिनिधित्व देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करते हैं और उनके नेतृत्व में काशी ने ऐतिहासिक बदलाव देखा है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि 2014 से पहले काशी की स्थिति किसी से छुपी नहीं थी, लेकिन आज वही काशी विकास, स्वच्छता और आधुनिक सुविधाओं का उदाहरण बन चुकी है। योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि काशी को बदनाम करने की लगातार साजिश रची जा रही है और कुछ लोग जानबूझकर भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं। उनके अनुसार काशी में आज न कोई डर है और न ही किसी तरह का भेदभाव, हर व्यक्ति यहां सम्मान और सुरक्षा के साथ आ सकता है।
मणिकर्णिका घाट पर राजनीति
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मणिकर्णिका घाट को लेकर चल रहे विवाद पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग काशी की विरासत को बदनाम करने में लगातार लगे हुए हैं और मणिकर्णिका घाट को लेकर अनर्गल बयानबाजी की जा रही है। योगी ने साफ किया कि घाट पर जो भी कार्य हो रहा है, वह सीएसआर फंड से किया जा रहा है, इसमें सरकारी धन का कोई उपयोग नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में अंतिम संस्कार का विशेष महत्व है और मणिकर्णिका घाट हजारों वर्षों से इस परंपरा का साक्षी रहा है। मुख्यमंत्री ने भावुक शब्दों में कहा कि आज भी कई लोग अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई सम्मान के साथ नहीं दे पाते, इसलिए घाट पर मूलभूत सुविधाओं का विकास जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें विकास कार्यों में बाधा डालना चाहती हैं और काशी की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि काशी के विकास का विरोध करने वाले लोग दरअसल सनातन परंपरा और जनभावनाओं का अपमान कर रहे हैं।
2014 के बाद बदली काशी की छवि
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने बयान में 2014 से पहले और बाद की काशी की तस्वीर भी सामने रखी। उन्होंने कहा कि पहले काशी के घाटों की हालत खराब थी, गंगा स्नान योग्य नहीं थी और सड़कों पर जाम आम बात थी। आज काशी में देश का सबसे बड़ा नमो घाट है, गंगा का जल स्वच्छ है और श्रद्धालु बिना डर के स्नान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि काशी की सड़कें फोरलेन से जुड़ चुकी हैं, शहर में अब जाम की समस्या नहीं है और देश के अलग-अलग हिस्सों से सीधी ट्रेन सेवाएं उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि काशी का देश की जीडीपी में योगदान बढ़ा है और यहां रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। बीते वर्ष करीब 11 करोड़ लोगों ने काशी आकर विकास कार्यों को देखा और अनुभव किया। योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि अहिल्याबाई होल्कर जैसी महान शासिका को कभी सम्मान नहीं दिया गया, जबकि आज उनकी परंपरा के अनुरूप विकास कार्य किए जा रहे हैं। अंत में उन्होंने दोहराया कि काशी को बदनाम करने की हर साजिश नाकाम होगी और विकास की यह यात्रा बिना रुके आगे बढ़ती रहेगी।
