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शाहजहांपुर में शिक्षा का सबसे बड़ा दान! 550 करोड़ दान कर स्वामी चिन्मयानंद ने सबको चौंकाया

पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने 550 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय के लिए दान कर दी। शाहजहांपुर में बनने वाली इस यूनिवर्सिटी से हजारों छात्रों को बड़ा फायदा मिलेगा।

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उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में एक ऐसा फैसला सामने आया है जिसने शिक्षा जगत में नई चर्चा छेड़ दी है। पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और मुमुक्षु आश्रम के अधिष्ठाता स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने 550 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति शिक्षा के लिए दान कर दी है। यह संपत्ति अब स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय के नाम पर राज्य सरकार को हस्तांतरित की जाएगी। इस कदम को जिले की शिक्षा व्यवस्था के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है। स्वामी चिन्मयानंद का कहना है कि उनका उद्देश्य निजी लाभ नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर शिक्षा व्यवस्था तैयार करना है। उन्होंने कहा कि वर्षों से शाहजहांपुर में एक बड़े विश्वविद्यालय की जरूरत महसूस की जा रही थी और अब यह सपना धीरे-धीरे साकार होता दिखाई दे रहा है। इस फैसले के बाद इलाके के छात्रों और अभिभावकों में खुशी का माहौल है।

छोटे गुरुकुल से शुरू हुआ था शिक्षा का सफर

स्वामी चिन्मयानंद ने बताया कि शाहजहांपुर में शिक्षा की मजबूत नींव कई दशक पहले रखी गई थी। उन्होंने कहा कि 1940 के दशक में स्वामी शुकदेवानंद सरस्वती ने बेहद सीमित संसाधनों के बीच एक छोटे गुरुकुल की शुरुआत की थी। उस समय जिले में उच्च शिक्षा के बहुत कम साधन थे और छात्रों को पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता था। इसके बाद वर्ष 1952 में इंटर कॉलेज और 1964 में डिग्री कॉलेज की स्थापना की गई। धीरे-धीरे यह संस्थान शिक्षा का बड़ा केंद्र बनते चले गए। स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि स्वामी शुकदेवानंद का सपना था कि शाहजहांपुर ऐसा शैक्षिक केंद्र बने जहां छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए लखनऊ, दिल्ली या बरेली न जाना पड़े। उन्होंने कहा कि आज उसी सपने को आगे बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय का निर्माण किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी के साथ बैठक के बाद तेज हुआ काम

स्वामी चिन्मयानंद ने बताया कि शाहजहांपुर में विश्वविद्यालय बनाने की मांग लंबे समय से उठ रही थी। हालांकि जमीन और संसाधनों की वजह से यह योजना आगे नहीं बढ़ पा रही थी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के साथ हुई एक बैठक के बाद इस दिशा में गंभीरता से काम शुरू हुआ। इसके बाद विश्वविद्यालय के लिए उपयुक्त जमीन की तलाश की गई और मुमुक्षु आश्रम परिसर की भूमि को इसके लिए चुना गया। अब इसी भूमि और उससे जुड़ी संपत्तियों को विश्वविद्यालय के नाम किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस परियोजना से हजारों छात्रों को उच्च शिक्षा के नए अवसर मिलेंगे। साथ ही शाहजहांपुर और आसपास के जिलों के युवाओं को बाहर शहरों में जाने की जरूरत भी कम होगी। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह विश्वविद्यालय भविष्य में पूरे क्षेत्र के लिए बड़ा शैक्षिक केंद्र बन सकता है।

छात्रों के भविष्य को बेहतर बनाने की कोशिश

स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि यह सिर्फ जमीन या भवन का दान नहीं है, बल्कि शिक्षा के भविष्य में किया गया निवेश है। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य और देश की तरक्की अच्छी शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर करती है। यदि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी तो वे आत्मनिर्भर बनेंगे और समाज को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं होगा, बल्कि छात्रों को आधुनिक शिक्षा और बेहतर अवसर उपलब्ध कराना भी होगा। माना जा रहा है कि आने वाले समय में यहां नए कोर्स, रिसर्च सेंटर और तकनीकी शिक्षा से जुड़े संस्थान भी विकसित किए जा सकते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह फैसला शाहजहांपुर की पहचान बदल सकता है। वहीं शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने इसे समाज और विद्यार्थियों के हित में उठाया गया बड़ा कदम बताया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि विश्वविद्यालय का निर्माण कितनी तेजी से पूरा होता है और छात्रों को इसका लाभ कब से मिलना शुरू होगा।

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