उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में गोरखपुर शहर के लिए एक बेहद अहम और बहुप्रतीक्षित परियोजना को मंजूरी दी गई है। गोरखपुर नगर निगम क्षेत्र में सीवरेज सुविधा के विस्तार के लिए 721 करोड़ 40 लाख 41 हजार रुपये की परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस फैसले के साथ ही शहर के 17 वार्डों में रहने वाले 43,604 घरों को बड़ी राहत मिलने जा रही है, जो अब तक सेप्टिक टैंकों पर निर्भर थे। इस योजना से करीब 1 लाख 95 हजार 947 लोगों को सीधे लाभ होगा। लंबे समय से शहर के कई इलाकों में सीवर व्यवस्था की कमी के कारण लोगों को गंदगी, जलभराव और बीमारियों का सामना करना पड़ रहा था। कैबिनेट के इस फैसले को गोरखपुर के शहरी विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे न केवल बुनियादी सुविधाएं बेहतर होंगी, बल्कि शहर की छवि भी बदलेगी।
केंद्र, राज्य और नगर निगम मिलकर उठाएंगे खर्च का बोझ
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए खर्च का पूरा खाका भी तय कर लिया गया है। योगी सरकार की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, इस योजना में भारत सरकार 231 करोड़ 34 लाख 94 हजार रुपये का योगदान देगी। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से 435 करोड़ 36 लाख रुपये की हिस्सेदारी होगी। इसके अलावा नगर निकाय के अंश के रूप में गोरखपुर नगर निगम 27 करोड़ 76 लाख 48 हजार रुपये खर्च करेगा। तीनों स्तर की सरकारों की संयुक्त भागीदारी से यह परियोजना जमीन पर उतरने जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की साझा वित्तीय संरचना से परियोजना को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी। यह योजना न केवल सीवरेज व्यवस्था को दुरुस्त करेगी, बल्कि स्वच्छ भारत मिशन, जल संरक्षण और शहरी पर्यावरण सुधार जैसे बड़े लक्ष्यों को भी मजबूती देगी।
इन 17 वार्डों में बिछेगी 342 किमी लंबी सीवर लाइन
परियोजना के तहत गोड़धोइया नाला के कैचमेंट एरिया में आने वाले 17 वार्डों में बड़े पैमाने पर सीवर नेटवर्क विकसित किया जाएगा। इन वार्डों में बाबा राघव दास नगर (आंशिक), चरगांवा (आंशिक), अशोक नगर, शिवपुर (आंशिक), तुलसीराम पश्चिमी, शहीद शिव सिंह क्षेत्री नगर, पंडित राम प्रसाद बिस्मिल नगर, हरसेवकपुर (आंशिक), विश्वकर्मापुरम बौलिया, शालिग्राम नगर (आंशिक), लोहिया नगर, कृष्णानगर, शाहपुर, मैत्रीपुरम, शक्तिनगर, राम जानकीनगर और विष्णुपुरम शामिल हैं। इन क्षेत्रों में कुल 342.19 किलोमीटर लंबी सीवर लाइन बिछाई जाएगी, जिससे 43,604 घर सीधे जोड़े जाएंगे। इन घरों से निकलने वाला सीवेज पाइपलाइन के जरिए गोड़धोइया नाला परियोजना के अंतर्गत निर्माणाधीन 38 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचेगा। वहां वैज्ञानिक तरीके से शोधन के बाद इसे आगे छोड़ा जाएगा, जिससे रामगढ़झील और आसपास के जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाया जा सकेगा।
सीवेज पम्पिंग स्टेशन, सोलर प्लांट और बेहतर स्वास्थ्य की उम्मीद
इस पूरी परियोजना में आधुनिक तकनीक का भी खास ध्यान रखा गया है। योजना के तहत दो स्थानों पर सीवेज पम्पिंग स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनकी क्षमता क्रमशः 37.50 एमएलडी और 27 एमएलडी होगी। इसके साथ ही 1060 किलोवाट क्षमता का सोलर पावर प्लांट भी लगाया जाएगा, जिससे ऊर्जा की बचत होगी और संचालन लागत कम होगी। उत्तर प्रदेश जल निगम नगरीय के अधिशासी अभियंता पंकज कुमार ने बताया कि यह परियोजना गोरखपुर के लिए मील का पत्थर साबित होगी। उनके अनुसार, दशकों से चली आ रही सीवर और जल निकासी की समस्याओं का स्थायी समाधान इस योजना से संभव हो सकेगा। राज्य सरकार की मंजूरी मिलने के बाद शासनादेश जारी होते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने से शहर में स्वच्छता का स्तर सुधरेगा, जलजनित बीमारियों में कमी आएगी और लोगों के जीवन स्तर में स्पष्ट सुधार देखने को मिलेगा।
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