रामनगरी अयोध्या में एक ऐसा दिन देखने को मिला जिसने प्रेम की परिभाषा को एक नया अर्थ दिया। राम मंदिर के फैसले की छठवीं वर्षगांठ पर, जब पूरा शहर भक्ति और उल्लास में डूबा था, उसी समय अयोध्या के अभिषेक यादव और उनकी प्रेमिका इंदीमा खान ने समाज की सभी सीमाओं को पार करते हुए विवाह के बंधन में बंध गए।
यह विवाह राम जानकी मंदिर में हिंदू रीति-रिवाजों के साथ सम्पन्न हुआ, जहां रामलला को साक्षी मानकर दोनों ने अग्नि के सात फेरे लिए। उनके इस कदम ने यह साबित किया कि प्यार किसी धर्म, जाति या समाज की मर्यादा से नहीं बंधता, बल्कि विश्वास और सच्चाई से पनपता है।
तीन साल की प्रेम कहानी जिसमें आई जेल, पर टूटा नहीं भरोसा
अभिषेक और इंदीमा की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं। तीन साल पहले शुरू हुआ उनका रिश्ता उस समय विवादों में आ गया जब इंदीमा के परिवार ने इस प्रेम को स्वीकार नहीं किया। विरोध इतना बढ़ा कि अभिषेक को जेल भी जाना पड़ा।
लेकिन कहते हैं सच्चा प्यार हर परीक्षा पास कर जाता है। जेल से बाहर आने के बाद अभिषेक ने तय किया कि अब वह समाज की परवाह नहीं करेंगे — बस उस इंसान को अपना बनाएंगे जिसे वे दिल से चाहते हैं। उन्होंने कहा, “जब इंदीमा मेरे साथ खड़ी रही, तब मुझे यकीन हो गया कि यही मेरा सच्चा साथ है। रामलला को साक्षी मानकर हमने जीवनभर के रिश्ते की शुरुआत की है।”
राम मंदिर की वर्षगांठ बनी दो आत्माओं के मिलन का प्रतीक
9 नवंबर को अभिषेक और इंदीमा ने अपनी शादी का दिन इसलिए चुना क्योंकि यह वही तारीख है जब अयोध्या में राम मंदिर के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला आया था। उनके लिए यह दिन सिर्फ एक याद नहीं बल्कि आस्था और उम्मीद का प्रतीक था।
शहर के लोगों ने भी इस शादी को प्रेम और एकता का संदेश माना। सोशल मीडिया पर यह खबर तेजी से वायरल हो रही है, जहां लोग इस जोड़े को “अयोध्या का प्रतीक प्रेम” कह रहे हैं।
यह कहानी उस सोच को चुनौती देती है जो आज भी धर्म और समाज के नाम पर दीवारें खड़ी करती है। अभिषेक और इंदीमा ने दिखाया कि जब इरादा सच्चा हो, तो न जेल की सलाखें रोक सकती हैं, न मजहब की बंदिशें।
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