Monday, February 2, 2026
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बाबरी विध्वंस की तारीख पर अखिलेश यादव ने दरगाह में चढ़ाई चादर, जया बच्चन और डिंपल यादव भी रही मौजूद

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद विध्वंस की याद में फतेहपुर सीकरी स्थित हजरत सलीम चिश्ती की दरगाह पहुंचे।

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बाबरी मस्जिद विध्वंस की तारीख 6 दिसंबर के अवसर पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव फतेहपुर सीकरी स्थित हजरत शेख सलीम चिश्ती की दरगाह पहुंचे। इस मौके पर उनके साथ उनकी पत्नी और करहल सांसद डिंपल यादव और राज्यसभा सांसद जया बच्चन भी मौजूद रहीं। अखिलेश यादव ने दरगाह पर चादर चढ़ाई और मन्नत का धागा बांधा। इस दौरान उन्होंने पुराने समय की यादें भी साझा कीं। बता दें कि साल 2012 में भी अखिलेश यादव ने यही मन्नत बांधी थी, जो इस स्थल के प्रति उनके श्रद्धा और जुड़ाव को दर्शाता है।

दरगाह में की गई मन्नत और श्रद्धा

अखिलेश यादव ने हजरत सलीम चिश्ती दरगाह पर पहुंचकर चादर चढ़ाई और मन्नत के लिए धागा बांधा। यह धार्मिक और राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण कार्यक्रम माना गया। उन्होंने कहा कि दरगाह पर आने का उद्देश्य सिर्फ आध्यात्मिक है और हमेशा से यह उनका व्यक्तिगत और पारिवारिक रीति-रिवाज रहा है। जया बच्चन और डिंपल यादव ने भी दरगाह में शामिल होकर अपनी श्रद्धा जताई। इस मौके पर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने भी उन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

इंडिगो फ्लाइट विवाद पर अखिलेश यादव का बयान

दरगाह दौरे के बाद अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत की और इंडिगो फ्लाइट कैंसिलेशन विवाद पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण आम लोगों और उद्योगपतियों के बीच असंतुलन बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इंडिगो क्राइसिस जैसे मुद्दे आम जनता और व्यापार दोनों को प्रभावित कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने एसआईआर और वोटिंग संबंधी चिंता पर भी बात की और स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी हमेशा अपने वोटों की सुरक्षा के लिए काम करती है।

राजनीतिक और सामाजिक महत्व

अखिलेश यादव का यह दरगाह दौरा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी चर्चा का विषय बना। बाबरी मस्जिद विध्वंस की तारीख पर दरगाह जाना समाज और पार्टी के लिए संदेश देता है कि नेता अपने सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों से जुड़े हुए हैं। जया बच्चन और डिंपल यादव का साथ इस अवसर को और भी महत्वपूर्ण बनाता है। इस कार्यक्रम के माध्यम से अखिलेश यादव ने यह दिखाने की कोशिश की कि राजनीति और धार्मिक श्रद्धा साथ-साथ निभाई जा सकती है, और यह समाज के विभिन्न वर्गों के लिए एक प्रेरणा भी बन सकती है।

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