Vikas Dubey Death Certificate: कानपुर के चर्चित बिकरू कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे की मौत को करीब छह साल बीत चुके हैं, लेकिन उसका मृत्यु प्रमाण पत्र अब तक जारी नहीं हो सका है। मामला एक दस्तावेजी गलती के कारण अटका हुआ है। पंचायतनामा में विकास दुबे के पिता का नाम रामकुमार की जगह राजकुमार दर्ज हो गया था। इसी गलत जानकारी के चलते मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब प्रशासन ने रिकॉर्ड की जांच कर इस गलती को ठीक कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पिता के नाम की गलती से अटका डेथ सर्टिफिकेट
विकास दुबे की मौत के बाद तैयार किए गए पंचायतनामा में उसके पिता के नाम की गलत एंट्री हो गई थी। दस्तावेजों में यह नाम सही नहीं होने के कारण मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने में परेशानी आ रही थी। मामले को लेकर विकास की पत्नी ऋचा दुबे ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने रिकॉर्ड की जांच शुरू की। मंगलवार को सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और मामले से जुड़े दस्तावेजों को देखा। अधिकारियों ने पंचायतनामा समेत दूसरे रिकॉर्ड का भी मिलान किया।
पुलिस रिपोर्ट के बाद सुधरेगा रिकॉर्ड
प्रशासन के मुताबिक अब पिता के नाम में दर्ज गलती को ठीक कराने के लिए पुलिस और संबंधित विभागों से संपर्क किया जा रहा है। अधिकारियों की ओर से आवश्यक रिपोर्ट तैयार कराई जाएगी। रिकॉर्ड में सही नाम दर्ज होने के बाद मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके बाद नगर निगम की ओर से विकास दुबे का डेथ सर्टिफिकेट बनाया जा सकेगा। यानी करीब छह साल से अटका यह काम अब दस्तावेजों में सुधार के बाद पूरा होने की उम्मीद है।
पत्नी बोलीं- डेथ सर्टिफिकेट नहीं होने से आर्थिक परेशानी
विकास दुबे की पत्नी ऋचा दुबे का कहना है कि मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं होने के कारण परिवार को आर्थिक और संपत्ति से जुड़े कामों में परेशानी हो रही है। उनके मुताबिक विकास के नाम पर एलआईसी की कुछ पॉलिसियां थीं, जिन्हें नॉमिनी के नाम ट्रांसफर कराने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र की जरूरत है। इसके अलावा जमीन-जायदाद से जुड़े रिकॉर्ड के हस्तांतरण में भी यह दस्तावेज जरूरी है। ऋचा का कहना है कि वह पुलिस थाने, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र कार्यालय और नगर निगम के चक्कर लगा चुकी हैं, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ।
2 जुलाई की घटना के बाद 10 जुलाई को हुआ था एनकाउंटर
बिकरू कांड 2 जुलाई 2020 की रात हुआ था। विकास दुबे और उसके साथियों पर पुलिस टीम पर हमला करने का आरोप लगा था, जिसमें आठ पुलिसकर्मियों की मौत हुई थी। घटना के बाद विकास दुबे की तलाश शुरू हुई और उसे मध्य प्रदेश से पकड़ा गया। पुलिस के मुताबिक 10 जुलाई 2020 को कानपुर लाते समय सचेंडी क्षेत्र में वाहन पलटने के बाद उसने भागने की कोशिश की, जिसके बाद हुई मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई। अब इतने साल बाद भी उसका मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बन पाना एक बार फिर चर्चा में है।
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