छात्र आंदोलनों से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश सुनाया है। कोर्ट ने 20 से 25 जुलाई के बीच हुए स्टूडेंट प्रोटेस्ट से संबंधित दर्ज FIR को बंद करने का निर्देश दिया है। आदेश के बाद इन मामलों में आगे किसी तरह की जांच या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि इन मामलों को पूरी तरह समाप्त माना जाएगा। पीठ ने कहा कि यह फैसला उन छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिन्होंने ईमानदार और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन में हिस्सा लिया था।
केंद्र सरकार ने भी दिया था केस वापस लेने का भरोसा
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को सरकार का रुख बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र आंदोलन के दौरान छात्रों से किए गए आश्वासनों को पूरा करने के लिए तैयार है। इनमें दर्ज मुकदमों को वापस लेना और भविष्य में ऐसे मामलों में FIR दर्ज नहीं करने जैसी बातें शामिल हैं। कोर्ट ने केंद्र को छात्रों की आत्महत्या के मामलों में उनके परिवारों के लिए मुआवजे की नीति तैयार करने का भी निर्देश दिया है। इसके लिए सरकार को तीन महीने का समय दिया गया है।
कुछ लोगों पर जारी रहेगी जांच
सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि सभी मामलों में जांच पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई है। दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से संबंधित एक FIR में जांच आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई है। कोर्ट के सामने बताया गया कि इस मामले में 2,873 ऐसे लोगों का जिक्र है, जिन पर हत्या, दुष्कर्म और अपहरण जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े पुराने मामले रहे हैं। इसलिए इस FIR को बाकी मामलों से अलग रखा गया है। अदालत ने छात्रों और गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों के मामलों में अंतर को ध्यान में रखा।
हाथ जोड़कर धन्यवाद बोले सौरव दास, मार्च भी लिया वापस
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद CJP प्रवक्ता सौरव दास ने अदालत के प्रति आभार जताया। उन्होंने हाथ जोड़कर CJI और सभी वकीलों को धन्यवाद कहा। साथ ही उन्होंने 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लेने की घोषणा की। सौरव दास के इस फैसले की चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सराहना की और उन्हें शुभकामनाएं दीं। कोर्ट ने केंद्र को मुआवजा नीति तैयार कर राज्यों और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का भी निर्देश दिया है, ताकि पात्र परिवारों को सहायता देने की व्यवस्था बनाई जा सके।
