प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन स्नान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और ज्यादा गंभीर हो गया है। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्राधिकरण आमने-सामने आ गए हैं। मेला प्रशासन का कहना है कि मौनी अमावस्या के दिन हुई घटनाओं से मेले में अव्यवस्था फैलने का खतरा बढ़ गया था। इसी वजह से प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को दूसरा नोटिस भेजकर उनकी संस्था के नाम जो भूमि आवंटित की गई थी, उसे निरस्त करने की चेतावनी दी है। इस नोटिस ने पूरे माघ मेला क्षेत्र में हलचल तेज कर दी है और मामला अब सिर्फ स्नान व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जमीन आवंटन और भविष्य में मेले में भागीदारी पर भी संकट खड़ा हो गया है।
दूसरे नोटिस में क्या-क्या कहा गया?
मेला प्राधिकरण द्वारा जारी दूसरे नोटिस में सीधे तौर पर यह बात कही गई है कि भूमि आवंटन रद्द किया जा सकता है और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को आजीवन माघ मेले से प्रतिबंधित भी किया जा सकता है। नोटिस में मौनी अमावस्या की घटना का जिक्र करते हुए कहा गया कि उस दिन स्थिति बेहद संवेदनशील थी और बड़ी संख्या में स्नानार्थी संगम क्षेत्र की ओर बढ़ रहे थे। ऐसे समय में किसी भी तरह की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन से भगदड़ जैसी स्थिति बन सकती थी, जिससे जनहानि का खतरा पैदा हो सकता था। प्रशासन ने नोटिस में यह सवाल भी उठाया कि जब उस दिन सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए खास नियम लागू थे, तो फिर ऐसे कदम क्यों उठाए गए, जिनसे हालात बिगड़ने की आशंका बढ़ गई।
मौनी अमावस्या पर बग्घी विवाद बना बड़ा मुद्दा
प्रशासन के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन संगम क्षेत्र में वाहन ले जाने पर रोक की घोषणा की जा रही थी। पुलिस और मेला प्रशासन लगातार अपील कर रहे थे कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए नियमों का पालन जरूरी है। इसी दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा बग्घी लेकर संगम नोड की ओर जाने का प्रयास किया गया, जिससे व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ गया। मेला प्रशासन का कहना है कि उस समय स्नानार्थियों की भारी भीड़ को संभालना पहले से ही चुनौतीपूर्ण था और किसी भी अतिरिक्त गतिविधि से भगदड़ की आशंका पैदा हो सकती थी। नोटिस में इसी बिंदु को आधार बनाते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मेले की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और सामान्य व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता है, और किसी भी व्यक्ति या संस्था को नियमों से ऊपर नहीं रखा जा सकता।
24 घंटे का अल्टीमेटम, बढ़ सकती है कार्रवाई
मेला प्राधिकरण ने इस नोटिस में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से 24 घंटे के भीतर जवाब देने को कहा है। प्रशासन का संकेत साफ है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो भूमि आवंटन निरस्त करने के साथ आगे की कड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है। वहीं दूसरी तरफ इस पूरे विवाद को लेकर समर्थकों और श्रद्धालुओं में भी चर्चा तेज है, क्योंकि माघ मेले में धार्मिक संस्थाओं की मौजूदगी हमेशा से अहम मानी जाती रही है। अब देखना यह होगा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इस नोटिस का क्या जवाब देते हैं और प्रशासन आगे किस तरह का निर्णय लेता है। फिलहाल प्रयागराज माघ मेले में यह मुद्दा बड़ा विवाद बन चुका है और आने वाले समय में इसकी गूंज और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
