विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को प्रोत्साहित करने के नियम-2026’ को लेकर देशभर में बहस छिड़ी हुई है और अब इसका असर सीधे सियासत पर दिखाई देने लगा है। खास तौर पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इस मुद्दे ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर हलचल मचा दी है। लखनऊ के बीकेटी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कुम्हरावां मंडल में पार्टी के पदाधिकारियों ने UGC के नियमों को छात्रों के भविष्य के लिए नुकसानदेह बताते हुए खुला विरोध दर्ज कराया है। यह विरोध केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मंडल महामंत्री समेत कुल 11 पदाधिकारियों ने एक साथ पार्टी की सदस्यता और अपने पदों से इस्तीफा देकर राजनीतिक गलियारों में सनसनी फैला दी है। माना जा रहा है कि यह मामला केवल एक मंडल तक सीमित नहीं रहेगा और आने वाले दिनों में अन्य क्षेत्रों में भी असंतोष सामने आ सकता है।
लखनऊ के कुम्हरावां मंडल में सामूहिक इस्तीफे से हड़कंप
बीकेटी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक योगेश शुक्ला हैं, लेकिन उनके क्षेत्र में ही पार्टी को बड़ा झटका लगा है। कुम्हरावां मंडल के महामंत्री अंकित तिवारी, मंडल मंत्री महावीर सिंह, मंडल उपाध्यक्ष आलोक सिंह, शक्ति केंद्र संयोजक मोहित मिश्र, वेद प्रकाश सिंह, नीरज पांडेय, युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष अनूप सिंह, मंडल महामंत्री राज विक्रम सिंह, पूर्व मंडल मंत्री अभिषेक अवस्थी, बूथ अध्यक्ष विवेक सिंह और पूर्व सेक्टर संयोजक कल सिंह ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया है। इन सभी ने अपना त्यागपत्र जिला अध्यक्ष को सौंपे जाने का दावा किया है, जिसका पत्र सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। स्थानीय स्तर पर इस घटनाक्रम को भाजपा संगठन के लिए गंभीर चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि एक साथ इतने पदाधिकारियों का इस्तीफा पार्टी की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े करता है।
जिलाध्यक्ष का बयान और इस्तीफा देने वालों का तर्क
कुम्हरावां मंडल के पदाधिकारियों के सामूहिक इस्तीफे को लेकर भाजपा जिलाध्यक्ष विजय मौर्या ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित पत्र की जानकारी उन्हें है, लेकिन अभी तक किसी पदाधिकारी ने व्यक्तिगत रूप से उन्हें इस्तीफा सौंपा नहीं है। वहीं दूसरी ओर, मंडल महामंत्री अंकित तिवारी और मंडल मंत्री महावीर सिंह ने स्पष्ट रूप से इस्तीफे की पुष्टि की है। अंकित तिवारी ने कहा कि पंडित दीन दयाल उपाध्याय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जिस विचारधारा के साथ पार्टी की नींव रखी थी, पार्टी आज उससे भटकती नजर आ रही है। उनके अनुसार UGC के नये नियमों को लागू कर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया है, जिसे वे स्वीकार नहीं कर सकते। इसी कारण उन्होंने न केवल पद बल्कि पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा देने का निर्णय लिया और आगे किसी भी पार्टी कार्यक्रम में शामिल न होने की बात कही।
UGC नियम 2026 पर बढ़ता विवाद और BJP के लिए सियासी चुनौती
UGC के नये नियमों को लेकर पहले ही छात्र संगठनों, शिक्षाविदों और अभिभावकों के बीच सवाल उठ रहे थे, लेकिन अब भाजपा के भीतर से विरोध के स्वर सामने आना पार्टी के लिए नई चुनौती बनता दिख रहा है। लखनऊ में हुआ यह सामूहिक इस्तीफा संकेत देता है कि नियमों को लेकर असंतोष केवल विपक्ष तक सीमित नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पार्टी नेतृत्व ने समय रहते इस मुद्दे पर संवाद नहीं किया, तो यह विरोध आगे और तेज हो सकता है। खासकर ऐसे समय में जब शिक्षा और युवाओं का भविष्य बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है, UGC नियमों को लेकर उठी यह बगावत भाजपा के लिए संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर मुश्किलें खड़ी कर सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पार्टी नेतृत्व इस असंतोष को शांत करने के लिए क्या कदम उठाता है।
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