Barabanki News: बाराबंकी के हेतमापुर गांव में सरयू नदी की तेज कटान अब बाबा नारायण दास धाम के लिए बड़ा खतरा बन गई है। नदी लगातार मंदिर की ओर बढ़ रही है और आसपास की जमीन तेजी से कट रही है। हालात को देखते हुए स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, धाम का भवन भी कटान की चपेट में आने लगा है और प्रशासन की टीमें मौके पर बचाव कार्य में जुटी हैं।
मंदिर तक पहुंची सरयू की तेज धार
हेतमापुर में पिछले कई दिनों से सरयू नदी के कटान का असर लगातार देखने को मिल रहा है। नदी के तेज बहाव ने खेतों और आबादी के साथ आसपास मौजूद धार्मिक स्थलों को भी प्रभावित किया है। बाबा नारायण दास धाम तक कटान पहुंचने से ग्रामीणों और श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ गई है। रिपोर्टों के अनुसार, मंदिर के निचले हिस्से को भी नदी की धारा नुकसान पहुंचा चुकी है। मंदिर को बचाने के लिए बोल्डर और ईंटों से भरी बोरियां लगाने जैसे प्रयास किए गए, लेकिन तेज बहाव के कारण मुश्किलें बनी हुई हैं।
पहले ही नदी में समा चुके हैं कई हिस्से
सरयू की कटान ने हेतमापुर में बड़े पैमाने पर नुकसान किया है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, गांव में कई मकान नदी में समा चुके हैं और एक पुरानी मस्जिद भी कटान की चपेट में आ चुकी है। बाबा नारायण दास धाम के आसपास भी जमीन लगातार नदी में जा रही है। प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं और मंदिर समेत प्रभावित इलाकों को सुरक्षित रखने की कोशिश की जा रही है।
मंदिर की सुरक्षा के लिए विधायक ने मांगी दुआ
मंदिर पर मंडराते खतरे के बीच रामनगर से समाजवादी पार्टी के विधायक फरीद महफूज किदवई का बयान भी सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कटान प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने के दौरान उन्होंने कहा कि उनकी दुआ है कि हेतमापुर का ऐतिहासिक मंदिर सुरक्षित रहे। विधायक ने इलाके में हुई तबाही पर चिंता जताई और मंदिर को लेकर भी लोगों की बढ़ती परेशानी का जिक्र किया। उत्तर प्रदेश विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर भी फरीद महफूज किदवई को रामनगर का विधायक बताया गया है।
अब प्रशासन के कदम पर टिकी नजर
बाबा नारायण दास धाम स्थानीय आस्था से जुड़ा प्रमुख धार्मिक स्थल है और यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना रहता है। ऐसे में नदी का लगातार मंदिर की ओर बढ़ना ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। प्रशासन और बाढ़ से जुड़े विभाग के अधिकारी मौके पर निगरानी कर रहे हैं। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि सरयू की कटान रोकने और मंदिर की संरचना को सुरक्षित रखने के लिए आगे क्या प्रभावी कदम उठाए जाते हैं।
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