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सिल्वर स्क्रीन पर ‘धुरंधर 2’ का धमाका या साज़िश? असली ‘जमील जमाली’ का फूटा गुस्सा, खोल दी फिल्म की पोल!

'Dhurandhar 2' फिल्म को लेकर उठा भारी विवाद। रीयल लाइफ 'जमील जमाली' ने ल्यारी के चित्रण पर जताई कड़ी आपत्ति। फिल्म को बताया प्रोपेगेंडा, कहा- ल्यारी आतंकवाद का अड्डा नहीं। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

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बॉलीवुड और ओटीटी की दुनिया में जब भी किसी रीयल लाइफ किरदार या संवेदनशील इलाके पर फिल्म बनती है, तो विवादों का होना लाजमी है। लेकिन इस बार मामला कुछ ज्यादा ही गरमा गया है। हालिया रिलीज फिल्म ‘धुरंधर 2’ (Dhurandhar 2) को लेकर रीयल लाइफ ‘जमील जमाली’ (Jameel Jamali) का पारा सातवें आसमान पर है। फिल्म देखने के बाद जमाली ने न केवल फिल्म की कहानी को सिरे से खारिज किया है, बल्कि मेकर्स पर इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने का गंभीर आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि जो कुछ पर्दे पर दिखाया जा रहा है, वह हकीकत से कोसों दूर है और इसके पीछे एक खास तरह का एजेंडा काम कर रहा है।

ल्यारी की पहचान पर हमला: ‘आतंकवाद का अड्डा’ कहने पर भड़के जमाली

फिल्म ‘धुरंधर 2’ में पाकिस्तान के चर्चित इलाके ‘ल्यारी’ (Lyari) को अपराध और दहशतगर्दी के गढ़ के रूप में पेश किया गया है। इसी बात ने असली जमील जमाली को सबसे ज्यादा आहत किया है। उनका कहना है कि ल्यारी केवल गैंगवार या हथियारों की जगह नहीं है, बल्कि वहां का अपना एक समृद्ध इतिहास, फुटबॉल की संस्कृति और मेहनतकश लोग हैं। फिल्म में जिस तरह से हर गली और नुक्कड़ पर आतंकवाद का साया दिखाया गया है, जमाली ने उसे ‘सिनेमैटिक लिबर्टी’ के नाम पर की गई एक गंदी राजनीति बताया है। उनके अनुसार, फिल्ममेकर्स ने मिर्च-मसाला लगाने के चक्कर में एक पूरे इलाके की छवि को दुनिया भर में खराब कर दिया है, जिसे सुधारने में दशकों लग सकते हैं।

नबील गबोल और रीयल लाइफ किरदारों का अपमान

विवाद की दूसरी बड़ी वजह फिल्म में नबील गबोल (Nabil Gabol) के परिवार और उनके बैकग्राउंड का चित्रण है। जमील जमाली ने आरोप लगाया कि फिल्म में रीयल लाइफ किरदारों के निजी जीवन और उनके संघर्षों को बहुत ही सतही और नकारात्मक तरीके से दिखाया गया है। राकेश बेदी (Rakesh Bedi) जैसे मंझे हुए कलाकारों की मौजूदगी के बावजूद, फिल्म की पटकथा पर सवाल उठ रहे हैं। जमाली का तर्क है कि अगर आप किसी जीवित व्यक्ति या उसके परिवार पर आधारित कहानी बना रहे हैं, तो कम से कम तथ्यों की जांच तो कर लेनी चाहिए थी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह फिल्म कोई कलाकृति नहीं, बल्कि एक प्रोपेगेंडा है जिसका मकसद लोगों को गुमराह करना और नफरत फैलाना है।

पर्दे का ‘धुरंधर’ बनाम हकीकत का संघर्ष

‘धुरंधर 2’ की रिलीज के बाद से ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है कि क्या सिनेमा को किसी की भावनाओं के साथ खेलने का हक है? जमील जमाली का दावा है कि फिल्म में दिखाए गए कई सीन पूरी तरह से काल्पनिक हैं और उनका असल घटनाओं से कोई लेना-देना नहीं है। फिल्म में गैंगस्टर्स को जिस तरह से ‘ग्लैमराइज’ किया गया है और राजनीतिक रसूख का जो खेल दिखाया गया है, वह हकीकत की जटिलताओं को नजरअंदाज करता है। जमाली ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि केवल कुछ व्यूज और पैसे कमाने के लिए किसी के वास्तविक संघर्ष को आतंकवाद का रंग देना बेहद शर्मनाक है। उनका मानना है कि फिल्म में ल्यारी के उस पक्ष को पूरी तरह दबा दिया गया जो शांति और विकास की बात करता है।

दर्शकों के बीच खिंची तलवारें: अब आगे क्या होगा?

जमील जमाली के इस कड़े रुख के बाद अब फिल्म की टीम और दर्शकों के बीच भी राय बंट गई है। जहाँ एक तरफ फिल्म के प्रशंसक इसे एक बेहतरीन थ्रिलर बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर ‘Boycott Dhurandhar 2’ जैसे ट्रेंड्स भी अपनी जगह बनाने लगे हैं। फिल्म समीक्षकों का मानना है कि इस विवाद से फिल्म की पब्लिसिटी तो बढ़ सकती है, लेकिन इसकी विश्वसनीयता पर गहरा दाग लग गया है। अब देखना यह होगा कि क्या फिल्म के निर्देशक या निर्माता जमील जमाली के इन आरोपों पर कोई सफाई पेश करते हैं या फिर विवाद की यह आग फिल्म के भविष्य को ही स्वाहा कर देगी। फिलहाल, जमील जमाली ने कानूनी विकल्प तलाशने की बात कहकर फिल्म मेकर्स की रातों की नींद उड़ा दी है।

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