कारोबारी संजय कपूर की करीब 30 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति को लेकर चल रहा विवाद अब और गंभीर हो गया है। यह मामला अब केवल पारिवारिक या सिविल विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके आपराधिक मोड़ लेने के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, बॉलीवुड अभिनेत्री करिश्मा कपूर के बच्चे समायरा कपूर और कियान कपूर ने अपने पिता की दूसरी पत्नी प्रिया कपूर के खिलाफ अदालत में आपराधिक कार्रवाई की मांग की है। बच्चों का आरोप है कि उनकी सौतेली मां ने संजय कपूर की वसीयत में जानबूझकर हेरफेर की, ताकि उन्हें पिता की संपत्ति से वंचित किया जा सके। इस पूरे विवाद ने न सिर्फ कपूर परिवार को चर्चा में ला दिया है, बल्कि कानूनी गलियारों में भी हलचल मचा दी है।
हस्ताक्षर के दिन कहां थे संजय कपूर?
समायरा और कियान कपूर ने अदालत में दावा किया है कि जिस दिन संजय कपूर की वसीयत पर हस्ताक्षर होने की बात कही जा रही है, उस दिन वे गुरुग्राम में मौजूद ही नहीं थे। बच्चों के अनुसार, 21 मार्च को उनके पिता दिल्ली में थे और उसी दौरान करिश्मा कपूर उनसे व्हाट्सएप के जरिए संपर्क में थीं। बातचीत का विषय बच्चों की पुर्तगाली नागरिकता से जुड़ा बताया गया है। वहीं प्रिया कपूर ने अदालत को दिए अपने बयान में कहा है कि वसीयत पर 21 मार्च को एआईपीएल के गुरुग्राम ऑफिस में दो गवाहों—दिनेश अग्रवाल और नितिन शर्मा—की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए थे। दोनों पक्षों के बयानों में अंतर ने वसीयत की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डिजिटल रिकॉर्ड में खामियां और आपराधिक धाराएं
इस मामले में सबसे अहम पहलू वसीयत से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड को माना जा रहा है। समायरा और कियान कपूर का आरोप है कि प्रस्तुत डिजिटल रिकॉर्ड में संजय कपूर का कोई स्पष्ट डिजिटल फुटप्रिंट मौजूद नहीं है। उनका कहना है कि वसीयत का पहला मसौदा 10 फरवरी 2025 को तैयार होने की बात कही गई है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इसे किसने तैयार किया। इसके अलावा, 17 मार्च को नितिन शर्मा के मोबाइल फोन पर वसीयत में बदलाव किए जाने का भी दावा किया गया है। बच्चों ने अदालत से मांग की है कि प्रिया कपूर, संजय कपूर और दोनों गवाहों के मोबाइल फोन जब्त कर उनकी फॉरेंसिक जांच कराई जाए। इसी आधार पर उन्होंने भारतीय न्याय संहिता की धारा 338 और 340 के तहत आपराधिक कार्रवाई की मांग की है।
सिविल विवाद से क्रिमिनल केस तक का सफर
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि अदालत को यह प्रतीत होता है कि वसीयत में जानबूझकर फर्जीवाड़ा किया गया है, तो यह मामला पूरी तरह से आपराधिक श्रेणी में आ सकता है। ऐसी स्थिति में प्रिया कपूर पर गंभीर कानूनी कार्रवाई संभव है, जिसमें कड़ी सजा तक का प्रावधान है। यह केस इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसमें डिजिटल सबूत, लोकेशन डेटा और गवाहों की भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है। फिलहाल अदालत ने सभी दलीलों को रिकॉर्ड पर लिया है और आगे की सुनवाई में यह तय होगा कि क्या यह विवाद केवल संपत्ति के बंटवारे तक सीमित रहेगा या फिर एक हाई-प्रोफाइल क्रिमिनल केस में तब्दील होगा। पूरे देश की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि अदालत इस संवेदनशील मामले में क्या रुख अपनाती है।
Read More-ईरान की सरकारी टीवी से ट्रंप को खुली मौत की धमकी, दुनिया ने थाम ली सांस—‘इस बार गोली नहीं चूकेगी’
