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इजरायल में नेतन्याहू की कुर्सी पर संकट! तो भारत में क्यों गदगद हुए CJP के सौरव दास, कहा- ‘जश्न मनाने का…’

इजरायल में सरकार गठन को लेकर बेंजामिन नेतन्याहू की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। गादी आइजेनकोट को 67 सांसदों का समर्थन मिलने की संभावना है। इस घटनाक्रम पर CJP नेता सौरव दास ने खुशी जताई है।

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इजरायल की राजनीति में आए नए घटनाक्रम ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। चुनाव के बाद सरकार बनाने की दावेदारी में इजरायल रक्षा बलों के पूर्व प्रमुख गादी आइजेनकोट आगे निकलते दिखाई दे रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, आइजेनकोट को 67 सांसदों का समर्थन मिलने की संभावना है, जबकि नेतन्याहू के पक्ष में 46 सांसदों का समर्थन बताया जा रहा है। इस बदलाव के बाद इजरायल में नई सरकार के गठन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। लंबे समय तक देश की राजनीति में प्रभाव रखने वाले नेतन्याहू के लिए यह स्थिति बड़ा झटका मानी जा रही है। हालांकि, सरकार गठन की अंतिम तस्वीर आगे की राजनीतिक प्रक्रिया और औपचारिक फैसलों पर निर्भर करेगी।

नेतन्याहू के पिछड़ने पर सौरव दास ने मनाई खुशी

इजरायल के इस राजनीतिक घटनाक्रम पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने नेतन्याहू के कमजोर पड़ने पर खुशी जाहिर करते हुए इसे ‘जश्न मनाने का दिन’ बताया। अपनी पोस्ट में दास ने गाजा और फिलिस्तीन में मारे गए लोगों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि यह उन लोगों को याद करने का मौका है, जिन्होंने संघर्ष के दौरान अपनी जान गंवाई। दास की इस टिप्पणी का सीधा संबंध गाजा में इजरायली सैन्य कार्रवाई और उसके कारण हुई नागरिकों की मौतों को लेकर उनकी नाराजगी से है। उनकी पोस्ट सामने आने के बाद इजरायल की राजनीति के साथ-साथ इस बयान को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।CJP के सौरव दास

‘नेतन्याहू को अपने किए का परिणाम भुगतना चाहिए’

सौरव दास ने अपनी प्रतिक्रिया में उम्मीद जताई कि नेतन्याहू के खिलाफ आगे भी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू को वैसा ही अंजाम भुगतना चाहिए, जैसा उनके मुताबिक उन्होंने निर्दोष लोगों पर थोपा है। दास की यह टिप्पणी गाजा में हुई मौतों और वहां के मानवीय संकट को लेकर उनके कड़े रुख को दिखाती है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को केवल इजरायल की सत्ता में बदलाव के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे फिलिस्तीन में मारे गए लोगों के संदर्भ में भी जोड़ा। इससे पहले भी अमेरिकी चुनाव के नतीजों को लेकर दास ने खुशी जताई थी। अब इजरायल में नेतन्याहू के पिछड़ने पर उनकी प्रतिक्रिया फिर चर्चा में है।

अरब दलों का समर्थन बना अहम, UTG ने बनाई दूरी

सरकार गठन की इस कवायद में अरब दलों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग के साथ हुई विचार-विमर्श प्रक्रिया में अरब दलों ने आइजेनकोट के समर्थन का रुख अपनाया। बताया गया है कि 27 अक्टूबर को हुए चुनाव में 120 सदस्यीय इजरायली संसद में नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिलीं, जबकि आइजेनकोट के गठबंधन को 48 सीटों पर जीत हासिल हुई। वहीं, अरब दलों ने कुल 19 सीटें जीतकर सत्ता की गणित में अपनी अहमियत बढ़ा दी। दूसरी ओर, नेतन्याहू के पुराने सहयोगी यूनाइटेड तोराह जुडाइज्म (UTG) ने किसी भी उम्मीदवार का समर्थन नहीं करने का फैसला किया है। इससे नेतन्याहू की स्थिति और कमजोर हुई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या आइजेनकोट इन समर्थन के दम पर सरकार बनाने में सफल होंगे या इजरायल की राजनीति में कोई नया मोड़ आएगा।

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