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हार के बाद डोनाल्ड ट्रंप को लगा बड़ा झटका, US में हरमनप्रीत ढिल्लों ने अचानक दिया इस्तीफा, जानें क्यों?

अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के बाद ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका लगा है। न्याय विभाग की नागरिक अधिकार प्रमुख हरमीत ढिल्लों ने इस्तीफा दे दिया है। जानिए कौन हैं हरमीत ढिल्लों और उनके इस्तीफे की वजह क्या है।

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Harmeet Dhillon: अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के नतीजों के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी न्याय विभाग के नागरिक अधिकार प्रभाग की प्रमुख हरमीत ढिल्लों (Harmeet Dhillon) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। चुनाव के बाद प्रशासन छोड़ने वाली वह पहली वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल हैं। उनके इस्तीफे ने अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। हालांकि, उन्होंने अपने फैसले के पीछे किसी विवाद या दबाव को सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं बताया है। हरमीत ढिल्लों (Harmeet Dhillon) ने सोशल मीडिया के जरिए अपने पद से विदाई की जानकारी दी और कहा कि देश के नागरिक अधिकारों से जुड़े मामलों में काम करना उनके लिए बेहद सम्मान की बात रही। उनके जाने के बाद अब इस महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी किसे मिलेगी, इस पर भी नजरें टिकी हैं।

कौन हैं हरमीत ढिल्लों? ट्रंप की कानूनी टीम से रहा है पुराना नाता

हरमीत ढिल्लों  (Harmeet Dhillon) अमेरिकी राजनीति और कानूनी क्षेत्र का जाना-पहचाना नाम हैं। वह भारतीय मूल की अमेरिकी वकील हैं और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कानूनी टीम के साथ भी काम कर चुकी हैं। ट्रंप के चुनाव प्रचार अभियान के दौरान उन्होंने कानूनी सलाहकार की भूमिका निभाई थी। बाद में उन्हें अमेरिकी न्याय विभाग के नागरिक अधिकार प्रभाग में सहायक अटॉर्नी जनरल की जिम्मेदारी सौंपी गई। करीब डेढ़ साल तक इस पद पर रहते हुए उन्होंने विभाग की नीतियों और प्राथमिकताओं में कई बदलाव किए। अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने उनके इस्तीफे के बाद काम की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने विश्वास के साथ विभाग का नेतृत्व किया और नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए काम किया। वहीं, ढिल्लों ने राष्ट्रपति ट्रंप का आभार जताया है।

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कार्यकाल में बदली विभाग की दिशा, कई फैसलों पर हुआ विवाद

हरमीत ढिल्लों (Harmeet Dhillon) के कार्यकाल में नागरिक अधिकार प्रभाग का कामकाज काफी चर्चा में रहा। उन्होंने विविधता, समानता और समावेशन यानी DEI से जुड़ी नीतियों का विरोध किया और ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकताओं के अनुसार विभाग की दिशा बदलने पर जोर दिया। महिलाओं और लड़कियों के खेलों में सुरक्षा तथा हथियार रखने के संवैधानिक अधिकार जैसे मुद्दे भी उनकी प्राथमिकता में रहे। हालांकि, उनके नेतृत्व में विभाग को कर्मचारियों की भारी कमी का सामना करना पड़ा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 75 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ दी या उन्हें पद से हटाया गया। उनकी जगह नए वकीलों की नियुक्ति की गई, लेकिन पुराने कर्मचारियों की कमी पूरी करना आसान नहीं रहा। इस बदलाव को लेकर विभाग के कामकाज पर भी सवाल उठते रहे।

अदालतों में मिली हार और चुनावी मामलों से दूरी, क्या यही बनी बड़ी वजह?

हरमीत ढिल्लों (Harmeet Dhillon) के कार्यकाल का एक बड़ा हिस्सा चुनाव और मतदाता सूची से जुड़े कानूनी मामलों को लेकर भी सुर्खियों में रहा। न्याय विभाग ने कई राज्यों में मतदाता सूचियों से जुड़े दस्तावेज हासिल करने के लिए मुकदमे दायर किए थे। प्रशासन का तर्क था कि इससे गैर-अमेरिकी नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाने में मदद मिलेगी। हालांकि, कई अदालतों ने इन कोशिशों को खारिज कर दिया और मतदाताओं के अधिकारों तथा निजी जानकारी की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए। इसके अलावा कुछ विश्वविद्यालयों के खिलाफ भी यहूदी विरोध और भेदभाव के आरोपों को लेकर कार्रवाई की कोशिश हुई, लेकिन इन मामलों में भी विभाग को सीमित सफलता मिली। हाल के दिनों में चुनावी मामलों में हरमीत ढिल्लों (Harmeet Dhillon) की भूमिका कम होती दिखाई दी थी। अब उनके इस्तीफे के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या ट्रंप प्रशासन में आगे भी बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।

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