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अग्निवीरों पर मोदी सरकार का बड़ा फैसला! CJP के सौरव दास ने क्या दिया रिएक्शन?

अग्निवीरों के लिए मोदी सरकार का बड़ा फैसला। अब 75 फीसदी अग्निवीरों को दो साल की अतिरिक्त सेवा का मौका मिलेगा। जानिए अग्निपथ योजना में हुए बदलाव

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केंद्र सरकार ने अग्निपथ योजना को लेकर ऐसा फैसला लिया है, जिसने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। साल 2022 में सेना में भर्ती हुए अग्निवीरों के लिए अब चार साल की सेवा के बाद बाहर होने का रास्ता बदल गया है। केंद्र सरकार ने उनके लिए दो साल की अतिरिक्त सेवा का विकल्प मंजूर कर दिया है। इस फैसले के बाद अग्निवीरों की कुल सेवा अवधि छह साल तक हो सकती है। खास बात यह है कि इस दौरान जवानों को पहले से ज्यादा वेतन और बेहतर सेवा निधि का लाभ भी मिलेगा। सरकार के इस ऐलान को जहां अग्निवीरों के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं विपक्ष ने इसे अग्निपथ योजना में बड़ा बदलाव बताते हुए मोदी सरकार पर निशाना साधा है। सीजेपी के सौरव दास ने इस फैसले पर तंज कसते हुए इसे ‘मास्टरस्ट्रोक यू-टर्न’ बताया है।

75 फीसदी अग्निवीरों को दो साल की अतिरिक्त सेवा का मौका

रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय कैबिनेट ने पहले चार साल की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों के लिए नई व्यवस्था को मंजूरी दी है। इसके तहत पहले की तरह 25 फीसदी अग्निवीरों को मेरिट और निर्धारित नियमों के आधार पर नियमित सेना में शामिल करने का प्रावधान रहेगा। वहीं, बाकी 75 फीसदी अग्निवीरों को उनकी इच्छा के आधार पर दो साल की अतिरिक्त सेवा का अवसर दिया जाएगा। इस दौरान उन्हें पहले की तुलना में अधिक वेतन, बेहतर सेवा निधि पैकेज और वरिष्ठता से जुड़े लाभ मिलेंगे। दो साल की अतिरिक्त अवधि पूरी होने के बाद इन जवानों को भी नियमित सैनिक बनने का अवसर दिया जाएगा। हालांकि, इसके लिए उनकी सहमति और सेना की निर्धारित चयन प्रक्रिया को पूरा करना जरूरी होगा। यानी अब पहले बैच के अग्निवीरों के सामने सेना में आगे बने रहने का एक और रास्ता खुल गया है।

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सौरव दास ने बताया सरकार का यू-टर्न, बोले- बेरोजगारी का डर वास्तविक

सरकार के इस फैसले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। सीजेपी के सौरव दास ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने इस निर्णय को ‘मास्टरस्ट्रोक यू-टर्न’ करार दिया। सौरव दास का कहना है कि देश में बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहे युवाओं की चिंता बिल्कुल वास्तविक है और सरकार भी इस बात को समझ रही है। उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि सरकार डरी हुई है। वहीं, सीजेपी नेता आशुतोष रांका ने भी अग्निपथ योजना की शुरुआत पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जब अब अग्निवीरों की सेवा अवधि बढ़ाने और उन्हें आगे नियमित सैनिक बनने का अवसर देने की व्यवस्था की जा रही है, तो आखिर इस योजना को पहले जिस रूप में लागू किया गया था, उसकी जरूरत क्यों पड़ी थी? विपक्ष इस फैसले को सरकार की पुरानी नीति में बदलाव के तौर पर पेश कर रहा है।

2022 में शुरू हुई थी अग्निपथ योजना, अब पहले बैच को मिली राहत

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 14 जून 2022 को अग्निपथ योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत युवाओं को चार साल के लिए सेना में अग्निवीर के रूप में भर्ती करने का प्रावधान किया गया था। चार साल पूरे होने के बाद अधिकतम 25 फीसदी जवानों को नियमित सेवा में शामिल किया जाना था, जबकि बाकी 75 फीसदी को सेना से बाहर होना पड़ता। अब पहले बैच का चार साल का कार्यकाल पूरा होने के करीब है और इसी बीच सरकार ने नई व्यवस्था का ऐलान किया है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि पिछले चार वर्षों में अग्निवीरों के प्रदर्शन का आकलन किया गया है और उनकी कार्यक्षमता, अनुशासन, फिटनेस तथा तकनीकी कौशल पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से युवाओं को सेना में लंबे समय तक सेवा देने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा।

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