समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मनी लॉन्ड्रिंग के नए मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने संकेत दिया है कि मामले को इसी सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है। सोमवार को आजम खान की ओर से पेश वकील निजाम पाशा ने अदालत से जल्द सुनवाई की अपील की थी। फिलहाल सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं। अब देखना होगा कि शीर्ष अदालत से आजम खान को कोई राहत मिलती है या उनकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ती हैं।
तत्काल सुनवाई की मांग पर CJI सूर्यकांत ने क्या कहा?
आजम खान की गिरफ्तारी के खिलाफ दाखिल याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की मांग उठाई गई। उनके वकील निजाम पाशा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द सुनवाई करने का अनुरोध किया। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने तत्काल सुनवाई की अनुमति नहीं दी, लेकिन यह जरूर कहा कि याचिका इसी सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हो सकती है। इस संकेत के बाद आजम खान के समर्थकों और समाजवादी पार्टी के नेताओं की नजरें अदालत की अगली कार्रवाई पर हैं। दरअसल, आजम खान को 31 अक्टूबर को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया था। उनकी गिरफ्तारी के बाद परिवार और पार्टी के सामने कानूनी चुनौती खड़ी हो गई है। अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई इस मामले में काफी अहम मानी जा रही है।
14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए आजम खान
ईडी की गिरफ्तारी के बाद आजम खान को गाजियाबाद की विशेष अदालत में पेश किया गया था। रविवार को अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। यह कार्रवाई जौहर ट्रस्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई। अदालत में पेशी के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। कोर्ट परिसर के बाहर उनके समर्थकों की भीड़ भी जुटी रही। गौरतलब है कि आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को दोहरे पैन कार्ड से जुड़े मामले में जमानत मिलने के बाद रामपुर जेल से रिहाई मिली थी। हालांकि, जेल से बाहर आने के तुरंत बाद ईडी की कार्रवाई ने उनकी मुश्किलें फिर बढ़ा दीं। अब उनकी गिरफ्तारी को कानूनी चुनौती दी गई है।
जौहर विश्वविद्यालय की 1170 करोड़ की संपत्ति भी जांच के घेरे में
इस पूरे मामले की जड़ रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय और उससे जुड़ी संपत्तियों से संबंधित है। ईडी ने उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से दर्ज 58 एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी निर्माण कार्यों के लिए आवंटित धन का इस्तेमाल निजी विश्वविद्यालय के निर्माण में किया गया। ईडी ने 28 अक्टूबर को विश्वविद्यालय की जमीन और इमारतों को कुर्क करने की जानकारी दी थी। इन संपत्तियों का बाजार मूल्य करीब 1170 करोड़ रुपये बताया गया है। एजेंसी का दावा है कि कथित अनियमितताओं में आजम खान ने अपने राजनीतिक पद और प्रभाव का इस्तेमाल किया। हालांकि, ये जांच एजेंसी के आरोप हैं, जिनका अंतिम फैसला अदालत में होना है। इससे पहले जुलाई में रामपुर विकास प्राधिकरण ने विश्वविद्यालय परिसर की 38 इमारतों को गिराने का आदेश दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से यह तय होगा कि आजम खान को गिरफ्तारी के मामले में कोई राहत मिलती है या नहीं।
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