Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में वन्यजीव तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। यहां एसटीएफ और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए सात दुर्लभ बाज बरामद किए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन पक्षियों की कीमत करीब 1 करोड़ 40 लाख रुपये बताई जा रही है। इस मामले में मुंबई के रहने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। शुरुआती पूछताछ में जो जानकारी सामने आई है, उसने जांच एजेंसियों को भी हैरान कर दिया है। बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के जंगलों से पकड़े जाने वाले इन दुर्लभ पक्षियों को लखनऊ और मुंबई के रास्ते खाड़ी देशों तक पहुंचाया जाता था। इस पूरे नेटवर्क के तार कई राज्यों और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़े होने की आशंका है।
लखनऊ के मड़ियांव इलाके में छिपा था तस्करी का आरोपी
वन्यजीव तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एसटीएफ और WCCB की टीम को एक महत्वपूर्ण जानकारी मिली थी। इसके आधार पर संयुक्त टीम ने लखनऊ के मड़ियांव क्षेत्र स्थित इरादतनगर में छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान मुंबई निवासी फिरोज मसर्रत खान को गिरफ्तार किया गया। आरोपी मूल रूप से मुंबई के भायखला इलाके का रहने वाला बताया जा रहा है। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से सात दुर्लभ बाज (फाल्कन) बरामद किए गए। इसके अलावा एक मोबाइल फोन और आधार कार्ड भी मिला है। अधिकारियों के मुताबिक, बरामद किए गए पक्षी वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित श्रेणी में आते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी अनुमानित कीमत करीब 1.40 करोड़ रुपये बताई गई है। इतनी बड़ी कीमत के पक्षियों की बरामदगी के बाद जांच एजेंसियां इस मामले को गंभीरता से ले रही हैं। आरोपी को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ की जा रही है, ताकि तस्करी के पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
UP के जंगलों से पकड़े जाते थे दुर्लभ बाज
पूछताछ के दौरान वन्यजीव तस्करी के नेटवर्क को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। जांच में पता चला है कि यह गिरोह उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के जंगलों से दुर्लभ पक्षियों को पकड़ता था। इनमें गोरखपुर, लखीमपुर खीरी और सीतापुर के जंगल प्रमुख बताए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर पक्षियों को पकड़ने के बाद उन्हें अलग-अलग रास्तों से लखनऊ और मुंबई तक पहुंचाया जाता था। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय संपर्कों के जरिए इनकी सप्लाई खाड़ी देशों में की जाती थी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, दुबई, सऊदी अरब और बहरीन जैसे देशों में इन पक्षियों को ऊंचे दामों पर बेचने का काम किया जाता था। यानी उत्तर प्रदेश के जंगलों से शुरू होने वाला यह अवैध कारोबार विदेशों तक फैला हुआ था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस धंधे में केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि कई स्थानीय शिकारी, बिचौलिए और अंतरराष्ट्रीय खरीदार भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि, इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
मोबाइल फोन से खुल सकते हैं कई राज
इस मामले में अब जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। एसटीएफ और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की टीमें गिरफ्तार आरोपी से लगातार पूछताछ कर रही हैं। बरामद मोबाइल फोन को भी जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है। इसके जरिए तस्करी से जुड़े संपर्कों, संभावित खरीदारों और पक्षियों की सप्लाई के रास्तों की जानकारी जुटाई जा सकती है। एजेंसियां यह पता लगाने में लगी हैं कि दुर्लभ बाजों को पकड़ने के लिए जंगलों में किन लोगों की मदद ली जाती थी और उन्हें एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने की जिम्मेदारी किसकी होती थी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि अब तक कितने संरक्षित पक्षियों की तस्करी विदेशों में की जा चुकी है। वन्यजीवों का अवैध शिकार और व्यापार जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा है। ऐसे में सात दुर्लभ बाजों की बरामदगी को बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस अंतरराष्ट्रीय गिरोह के पीछे और कौन-कौन लोग हैं और विदेशों में बैठे इसके खरीदारों तक जांच एजेंसियां कब पहुंचती हैं।
