उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज मामले को लेकर सुर्खियों में आ गया है। संस्थान के भीतर पिछले काफी समय से चल रहे अवैध धर्मांतरण और महिला कर्मचारियों के शारीरिक-मानसिक शोषण का काला चिट्ठा अब खुलकर सामने आ गया है। यूपी एसटीएफ (STF) द्वारा की गई करीब 10 महीने की लंबी और गहन जांच के बाद कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिससे पूरे चिकित्सा जगत में हड़कंप मच गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, गांधी वार्ड, माइक्रोबायोलॉजी, पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी जैसे संवेदनशील विभागों में कुल 12 ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां कर्मचारियों और डॉक्टरों की मिलीभगत से यह घिनौना खेल चल रहा था।
मुख्य आरोपियों के चेहरे बेनकाब, शोषण और दबाव का सनसनीखेज तरीका
एसटीएफ की रिपोर्ट में कुल 5 मुख्य आरोपियों के नाम सामने आए हैं जो महिलाओं को अपने जाल में फंसाकर उनका शोषण करने और जबरन धर्मांतरण कराने के दोषी पाए गए हैं। इनमें पैथोलॉजी विभाग के सीनियर रेजिडेंट डॉ. रमीजउद्दीन नायक उर्फ रमीज मलिक का नाम मुख्य रूप से शामिल है, जिसे पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। आरोप है कि वह जूनियर महिला डॉक्टरों को झांसे में लेकर मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना देता था और मारपीट कर धर्म बदलने का दबाव बनाता था। इसके अलावा गांधी वार्ड के नर्सिंग स्टाफ नाफिस और फुरकान, रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. आदिल तथा माइक्रोबायोलॉजी विभाग के संविदा कर्मी शफात अली खान पर भी महिलाओं का पीछा करने, छेड़छाड़ करने और शादी का झांसा देकर जबरन निकाह व धर्मांतरण के लिए मजबूर करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों और प्राध्यापकों पर मामले को दबाने का गंभीर आरोप
इस पूरे मामले का सबसे डरावना पहलू यह है कि पीड़ितों की चीख-पुकार और शिकायतों को संस्थान के भीतर ही दबाने की सुनियोजित साजिश रची गई। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि केजीएमयू के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और विभागाध्यक्षों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के बजाय उन्हें बचाने का काम किया। पैथोलॉजी विभाग के एचओडी प्रो. सुरेश बाबू पर मुख्य आरोपी डॉ. रमीज को विभागीय बैठकों में क्लीनचिट देने और उल्टे पीड़ित महिला को ही मानसिक रूप से अस्वस्थ साबित कर मामला रफा-दफा करने का गंभीर आरोप है। इसी तरह एडिशनल प्रोफेसर डॉ. सुमायरा कयूम पर मुस्लिम रेजिडेंट्स को संरक्षण देने व भेदभाव करने तथा बायोमीट्री लैब इंचार्ज डॉ. वाहिद अली पर संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होकर आरोपियों का पक्ष लेने का पर्दाफाश हुआ है।
प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल, एसटीएफ की जांच अभी भी जारी
केजीएमयू जैसे देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थान में इस प्रकार की आपराधिक और अनैतिक गतिविधियों के उजागर होने के बाद आम जनता और बुद्धिजीवियों के बीच सुरक्षा व नैतिकता को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। एसटीएफ की इस विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर 5 मुख्य आरोपियों और 7 प्रशासनिक व विभागीय मददगारों सहित कुल 12 लोगों के खिलाफ आधिकारिक रूप से रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। हालांकि एसटीएफ की जांच अभी भी जारी है और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नाम या परतें खुलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण ने स्वास्थ्य संस्थानों के भीतर की सुरक्षा व्यवस्था और उच्च पदों पर बैठे जिम्मेदार लोगों की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
