लखनऊ के चर्चित शिवा शर्मा हत्याकांड में रोजाना नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। इस सनसनीखेज मामले की मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे इस समय सलाखों के पीछे दिन काट रही है। हाल ही में जब जेल प्रशासन ने उससे यह पूछा कि जेल में उससे मिलने कौन-कौन लोग आएंगे, तो उसने एक सूची सौंपी। इस सूची के सामने आने के बाद से ही पुलिस महकमे से लेकर आम लोगों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। श्रद्धा ने जिस तरह से अपने विजिटर्स के नाम चुने हैं, उसने हर किसी को गहरी सोच में डाल दिया है।
अपनों के नाम तो हैं, पर करीबी दोस्तों का जिक्र तक नहीं
जेल प्रशासन को सौंपी गई इस सूची में श्रद्धा दुबे ने केवल अपने पिता और रायबरेली में रहने वाले कुछ चुनिंदा परिजनों के नाम ही दर्ज कराए हैं। सबसे बड़ा सस्पेंस इस बात को लेकर है कि जिन लोगों के साथ श्रद्धा के अक्सर घूमने-फिरने, पार्टियों करने और रेस्तरां में घंटों समय बिताने की चर्चाएं आम थीं, वे सभी इस लिस्ट से पूरी तरह गायब हैं। जो दोस्त और करीबी उसके सबसे खास माने जाते थे, उनका एक भी नाम इस सूची में शामिल न होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर ऐसा क्या कारण है कि श्रद्धा ने अपने उन करीबी लोगों से दूरी बना ली, जो कभी हर कदम पर उसके साथ नजर आते थे?
पुलिस सत्यापन और पहचान की कड़ी औपचारिकताएं
जेल प्रशासन भी इस संवेदनशील मामले में पूरी तरह सतर्कता बरत रहा है। नियमों के मुताबिक, जेल में किसी भी बंदी से मिलने आने वाले व्यक्ति को अपनी पुख्ता पहचान साबित करनी होती है। बिना पहचान पत्र के सत्यापन के किसी भी बाहरी व्यक्ति को मिलने की अनुमति नहीं दी जाती है। यही वजह है कि जेल प्रशासन ने श्रद्धा द्वारा सौंपी गई इस सूची को तत्काल पुलिस सत्यापन के लिए भेज दिया है। पुलिस अब इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि सूची में शामिल लोगों की पृष्ठभूमि क्या है। कारागार मुख्यालय की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि किसे मुलाकात की हरी झंडी मिलेगी।
डर या सोची-समझी रणनीति? सस्पेंस बरकरार
श्रद्धा के करीबी दोस्तों के नाम इस लिस्ट में न होने को लेकर गलियारों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। पहली चर्चा यह है कि कहीं ये लोग पुलिस की जांच के घेरे में आने या पूछताछ के डर से खुद ही श्रद्धा से दूर तो नहीं हो गए हैं? वहीं दूसरी संभावना यह भी जताई जा रही है कि खुद श्रद्धा ने ही कानूनी पेचीदगियों से अपने करीबियों को बचाने के लिए उनके नाम इस सूची से बाहर रखे हों। हालांकि, इन अटकलों पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि जेल की चारदीवारी के भीतर श्रद्धा से मिलने कौन पहुंचेगा और इस अनसुने सस्पेंस के पीछे की असली वजह क्या है।
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