पंजाब के तरनतारन जिले से जुड़े गैंगस्टर अमृतपाल सिंह बाठ को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। विधानसभा में विधायक हरमीत सिंह संधू ने जानकारी दी कि बाठ को कनाडा के सरी बॉर्डर के पास गिरफ्तार किया गया है। उनके अनुसार, यह कार्रवाई गैंगस्टरों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान से जुड़ी है। हालांकि, गिरफ्तारी की परिस्थितियों और आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक पुष्टि का विवरण स्पष्ट होना बाकी है। बताया जाता है कि गांव मियांपुर निवासी अमृतपाल सिंह बाठ के खिलाफ हत्या और नशे से जुड़े कई मामले दर्ज हैं। आरोप है कि भारत में पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए वह फर्जी पासपोर्ट के सहारे कनाडा पहुंचा था। इस घटनाक्रम के बाद पंजाब में गैंगस्टर नेटवर्क और विदेश में छिपे अपराध के आरोपियों को वापस लाने की कार्रवाई पर चर्चा तेज हो गई है।
सरपंच सोनू चीमा की हत्या में आया था नाम
अमृतपाल बाठ का नाम तरनतारन जिले में हुए सरपंच सोनू चीमा हत्याकांड से भी जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक, 14 जनवरी 2024 को झब्बाल इलाके में सरपंच अवन कुमार उर्फ सोनू चीमा एक सैलून में बाल कटवाने पहुंचे थे। इसी दौरान बाइक पर आए हमलावर ने उन पर गोलियां चला दीं। गंभीर रूप से घायल सरपंच को इलाज के लिए अमृतसर ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। जांच के दौरान इस मामले में अमृतपाल सिंह बाठ का नाम सामने आने की बात कही गई थी। इसके अलावा, गांव लालू घुम्मण के एक बुजुर्ग सरपंच की हत्या के मामले में भी उसे नामजद किए जाने का उल्लेख है। इन मामलों में आरोपों और न्यायिक निष्कर्षों के बीच अंतर समझना जरूरी है। यदि कनाडा में गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो आगे की प्रक्रिया में भारतीय एजेंसियों की भूमिका और प्रत्यर्पण से जुड़े कानूनी पहलू अहम हो सकते हैं।
अकाली दल पर विधायक हरमीत सिंह संधू का हमला
अमृतपाल बाठ की गिरफ्तारी की जानकारी साझा करते हुए विधायक हरमीत सिंह संधू ने शिरोमणि अकाली दल पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी गैंगस्टरवाद को बढ़ावा दे रही है और सभी राजनीतिक दलों को इस समस्या के खिलाफ एकजुट होकर काम करना चाहिए। संधू के मुताबिक, पंजाब में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपराधियों के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नवंबर 2025 में विधानसभा उपचुनाव के दौरान अकाली दल ने बाठ की सास सुखविंदर कौर रंधावा को उम्मीदवार बनाया था। बाद में उसकी पत्नी कंचनप्रीत कौर रंधावा को भी संबंधित विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी दिए जाने की बात सामने आई। इन राजनीतिक संबंधों को लेकर अब बहस तेज हो सकती है, लेकिन किसी व्यक्ति के पारिवारिक रिश्ते अपने आप में अपराध में संलिप्तता का प्रमाण नहीं होते। फिलहाल, इस पूरे मामले में गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि, भारत में दर्ज मामलों की स्थिति और आगे की कानूनी कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।
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