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“हम अब किसी का इंतजार नहीं करेंगे…” पाकिस्तान पर एस. जयशंकर के इस दो टूक बयान ने दुनिया को चौंकाया!

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान और आतंकवाद को लेकर दो टूक बयान दिया है उन्होंने साफ किया कि भारत आतंकवाद को नजरअंदाज नहीं करेगा।

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान के साथ संबंधों और आतंकवाद के मुद्दे पर एक बार फिर भारत का कड़ा रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने ‘एनडीटीवी वर्ल्ड समिट’ कार्यक्रम के दौरान दो टूक शब्दों में कहा कि भारत अपने पड़ोसी देश के साथ बेहतर और मधुर रिश्ते जरूर चाहता है, लेकिन इसके लिए आतंकवाद के नासूर को किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जयशंकर ने दुनिया को यह संदेश दिया कि कोई भी देश वैश्विक मंच पर तभी गंभीरता से लिया जाता है जब वह अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के लिए कड़े जवाब देता है। भारत ने अतीत में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और बालाकोट एयरस्ट्राइक जैसी साहसिक कार्रवाई करके यह साबित कर दिया है कि देश अपनी रक्षा करना अच्छी तरह जानता है।

अमेरिका की समझ पर सवाल: 2008 के मुंबई हमलों की दिलाई याद

कार्यक्रम के दौरान जब विदेश मंत्री से यह सवाल पूछा गया कि क्या पाकिस्तान का सैन्य प्रतिष्ठान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को खुश करने में सफल रहा है और क्या इसका असर भारत-अमेरिका संबंधों पर पड़ेगा, तो जयशंकर ने इसका बेहद स्पष्ट जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ वाशिंगटन के समझने या न समझने तक सीमित नहीं है। अगर अमेरिका इस खतरे को इतनी गहराई से समझता था, तो साल 2008 में हुए भीषण मुंबई आतंकी हमलों के बाद उसने कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की? जयशंकर ने जोर देकर कहा कि जब भारत ने आतंकवाद के खिलाफ पलटवार किया, तो उसने इस बात की परवाह नहीं की कि वाशिंगटन उसकी कार्रवाई को समझ पाएगा या नहीं। भारत ने कदम इसलिए उठाया क्योंकि वह इस दर्द और खतरे को भली-भांति समझता था।

मुंबई में भारत-अमेरिका उच्चस्तरीय बैठक: ऊर्जा और रक्षा सहयोग पर मंथन

एक तरफ जहां कूटनीतिक मंचों पर आतंकवाद को लेकर तीखे तेवर देखने को मिले, वहीं दूसरी ओर भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भी अहम कदम उठाए गए। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और एस. जयशंकर के बीच मुंबई में एक उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई। पिछले पांच महीनों के भीतर अमेरिकी विदेश मंत्री का यह दूसरा भारत दौरा है, जो दोनों देशों के बीच गहरे होते रणनीतिक संबंधों को दर्शाता है। इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा तकनीक, द्विपक्षीय व्यापार और लोगों के बीच आपसी संबंधों को और अधिक विस्तृत करने पर गहन विचार-विमर्श किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से विशेष रूप से यह जोर दिया गया कि दोनों देशों के बीच बढ़ता ऊर्जा व्यापार भारत की आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाने के लिए परिवर्तनकारी साबित हो सकता है।

वैश्विक कूटनीति और पश्चिम एशिया के हालातों पर चर्चा

मुंबई में हुई इस महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता के दौरान केवल द्विपक्षीय मुद्दों तक ही चर्चा सीमित नहीं रही, बल्कि वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों पर भी विस्तार से मंथन किया गया। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, मार्को रुबियो और एस. जयशंकर ने दुनिया भर के तमाम संवेदनशील क्षेत्रीय मामलों के साथ-साथ पश्चिम एशिया में चल रहे घटनाक्रमों पर भी अपने विचार साझा किए। रुबियो ने यह भी दोहराया कि भारत जैसी विशाल उपभोक्ता मांग वाले देश को ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग मिलने से उसकी अर्थव्यवस्था और आपूर्ति शृंखला को स्थिरता मिलेगी। इन तमाम चर्चाओं के बीच यह पूरी तरह साफ हो गया कि भारत अपनी विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में पूरी तरह स्वतंत्र, आत्मनिर्भर और अडिग है, जो किसी भी बाहरी दबाव या अपेक्षाओं के दायरे में बंधने को तैयार नहीं है।

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