भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व लेग स्पिनर अमित मिश्रा (Amit Mishra) ने अपने करियर के एक ऐसे दौर का जिक्र किया है, जब उन्हें टीम इंडिया में दोबारा खेलने की उम्मीद थी, लेकिन उनकी यह चाहत पूरी नहीं हो सकी। आकाश चोपड़ा के साथ बातचीत में मिश्रा ने दावा किया कि चोटिल होने के समय विराट कोहली (Virat Kohli) भारतीय टीम के कप्तान थे और उन्होंने वापसी को लेकर उन्हें भरोसा दिया था।
मिश्रा के मुताबिक, फिट होने के बाद उन्होंने कोहली से संपर्क किया। उन्हें बताया गया कि करीब एक सप्ताह में जवाब मिल जाएगा, लेकिन उनका इंतजार लंबा होता चला गया। मिश्रा का दावा है कि एक सप्ताह के बाद कई और सप्ताह बीत गए, फिर भी उन्हें कोई फोन नहीं आया। उन्होंने दोबारा संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। इसके बाद उन्हें लगा कि शायद अब भारतीय टीम में वापसी का रास्ता बंद हो चुका है। हालांकि, यह अमित मिश्रा (Amit Mishra) का अपना अनुभव और दावा है। इस मामले पर विराट कोहली (Virat Kohli) का पक्ष यहां उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।
न्यूजीलैंड के खिलाफ 15 विकेट लेकर बने थे सीरीज के हीरो
अमित मिश्रा (Amit Mishra) के करियर की बात करें तो साल 2016 उनके लिए शानदार रहा था। न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की वनडे सीरीज में उन्होंने अपनी फिरकी का कमाल दिखाते हुए कुल 15 विकेट हासिल किए थे। इस प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया था। सीरीज के आखिरी वनडे में उन्होंने केवल 18 रन देकर पांच विकेट झटके थे और भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई थी।
इसके बावजूद चोट के बाद वह दोबारा भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की नहीं कर पाए। मिश्रा ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 22 टेस्ट, 36 वनडे और 10 टी20 मुकाबले खेले। उन्होंने टेस्ट में 76, वनडे में 64 और टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 16 विकेट हासिल किए। फरवरी 2017 में इंग्लैंड के खिलाफ खेलने के बाद वह भारत की ओर से कोई अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेल सके। इतने अच्छे रिकॉर्ड के बावजूद करियर का इस तरह रुक जाना उनके लिए निराशाजनक रहा।
धोनी की सलाह ने बढ़ाया था आत्मविश्वास, स्पिनरों को भी दिया संदेश
बातचीत के दौरान अमित मिश्रा (Amit Mishra) ने महेंद्र सिंह धोनी से जुड़ा एक अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि शुरुआती दिनों में उनकी तुलना महान स्पिनर अनिल कुंबले से की जाती थी, जिससे दबाव महसूस होता था। उस समय धोनी ने उन्हें अपनी गेंदबाजी पर भरोसा रखने और स्वाभाविक अंदाज में खेलने की सलाह दी थी। मिश्रा के अनुसार, इस बात से उनका आत्मविश्वास बढ़ा। उन्होंने आधुनिक क्रिकेट में स्पिन गेंदबाजों की भूमिका पर भी अपनी राय रखी। उनका मानना है कि स्पिनरों को केवल रन रोकने पर ध्यान देने के बजाय विकेट लेने की कोशिश करनी चाहिए।
उनके मुताबिक, अगर कोई गेंदबाज 50 रन देकर तीन विकेट हासिल करता है, तो उसका प्रदर्शन टीम के लिए उपयोगी हो सकता है। मिश्रा का यह भी मानना है कि सही मेहनत, फिटनेस और कौशल के दम पर स्पिन गेंदबाज तीनों प्रारूपों में सफल हो सकते हैं। उनके हालिया बयान ने चोट के बाद खिलाड़ियों की वापसी, चयन प्रक्रिया और टीम प्रबंधन के साथ संवाद को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
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