उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत द्वारा साहिल और मुस्कान को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद अब एक मासूम बच्ची के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मुस्कान ने जेल में रहते हुए एक बेटी को जन्म दिया था, जो अब करीब एक साल की बताई जा रही है। जिस मामले ने पूरे देश का ध्यान खींचा, उसमें अब सबसे बड़ी चिंता उस बच्ची की देखभाल और परवरिश को लेकर है। सवाल यह है कि जब उसकी मां जेल में है और परिवार भी जिम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं है, तो आखिर इस नन्ही जान का भविष्य कैसे सुरक्षित होगा?
मां के परिवार पर पहले से है बड़ी बेटी की जिम्मेदारी
मिली जानकारी के अनुसार, मुस्कान के मायके वाले पहले से उसकी बड़ी बेटी की परवरिश कर रहे हैं। ऐसे में परिवार के सामने दूसरी बच्ची की जिम्मेदारी उठाना मुश्किल बताया जा रहा है। दूसरी ओर, सौरभ राजपूत के परिवार ने भी बच्ची को अपने साथ रखने से इनकार कर दिया है। दोनों परिवारों की ओर से जिम्मेदारी नहीं लेने की स्थिति में बच्ची के पालन-पोषण को लेकर असमंजस बना हुआ है। हालांकि, बच्ची की स्थायी देखभाल की व्यवस्था को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि बच्ची का अपने माता-पिता के कथित अपराधों में कोई दोष नहीं है, इसलिए उसकी सुरक्षा और बेहतर भविष्य को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
क्या बाल संरक्षण गृह में गुजरेगा मासूम का बचपन?
यदि परिवार का कोई सदस्य बच्ची की देखभाल के लिए आगे नहीं आता है, तो बाल कल्याण समिति और संबंधित बाल संरक्षण विभाग उसकी स्थिति का आकलन कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर बच्ची को सुरक्षित देखभाल के लिए बाल संरक्षण गृह या किसी उपयुक्त बाल देखभाल संस्थान में रखा जा सकता है। हालांकि, उसे अनाथालय भेजे जाने की बात को अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। बच्ची के लिए कौन-सी व्यवस्था होगी, यह संबंधित अधिकारियों के निर्णय और उसकी परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। फिलहाल सबसे जरूरी है कि उसे सुरक्षित माहौल, उचित देखभाल, पोषण और स्नेह मिले।
मौत की सजा के बाद भी बाकी है कानूनी प्रक्रिया
साहिल और मुस्कान को अदालत से मौत की सजा मिलने का अर्थ यह नहीं है कि उन्हें तुरंत फांसी दे दी जाएगी। कानून के तहत आगे की न्यायिक प्रक्रिया और अपील के अवसर मौजूद हैं। इस बीच बच्ची की परवरिश का सवाल अलग से ध्यान देने योग्य है। प्रशासन और बाल संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं की भूमिका अहम हो सकती है, ताकि बच्ची को परिवार की परिस्थितियों के कारण उपेक्षा का सामना न करना पड़े। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि उसकी देखभाल की जिम्मेदारी कौन उठाता है और उसके सुरक्षित भविष्य के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
Read More-ताई के साथ भागने के लिए रची खौफनाक साजिश! 4 साल के भतीजे को जंगल में छोड़ा, ऐसे पकड़ा गया आरोपी
