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 पेट्रोल के बाद अब रसोई गैस में भी होगी मिलावट? सरकार कर रही तैयारी, जानें आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर

PNG Gas:सरकार पाइपलाइन गैस में 5% हाइड्रोजन मिलाने की तैयारी कर रही है। जानें इस प्रस्ताव से रसोई गैस की कीमत, सुरक्षा और आम लोगों के बजट पर क्या असर पड़ सकता है।

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PNG Gas Hydrogen Blending: पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के बाद अब सरकार पाइपलाइन से घरों तक पहुंचने वाली प्राकृतिक गैस यानी PNG में भी बदलाव की तैयारी कर रही है। इसके तहत PNG में 5 फीसदी तक हाइड्रोजन मिलाने का प्रस्ताव सामने आया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) ने इस दिशा में एक ड्राफ्ट तैयार किया है। हालांकि, अभी इस योजना को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर रसोई गैस में हाइड्रोजन की ब्लेंडिंग शुरू होती है, तो क्या इससे गैस की कीमतें कम होंगी या आम लोगों को पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे?

 PNG गैस में क्यों मिलाई जाएगी हाइड्रोजन?

भारत अपनी प्राकृतिक गैस की जरूरतों का एक हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति प्रभावित होने से देश की ऊर्जा जरूरतों पर असर पड़ता है। ऐसे में सरकार वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर विचार कर रही है। इसी कड़ी में PNG में 5 फीसदी तक हाइड्रोजन मिलाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक गैस पर निर्भरता कम करना और ऊर्जा के दूसरे विकल्पों को बढ़ावा देना है। फिलहाल PNGRB के ड्राफ्ट पर सुझाव मांगे जा रहे हैं। मंजूरी मिलने के बाद भी इसे लागू करने से पहले तकनीकी जांच, पाइपलाइन की क्षमता और सुरक्षा मानकों का आकलन करना होगा। इसलिए फिलहाल इसे लागू हो चुका फैसला समझना सही नहीं होगा।

गैस सस्ती होगी या बढ़ जाएगा रसोई का बजट?

PNG में हाइड्रोजन की ब्लेंडिंग से कीमतों पर क्या असर पड़ेगा, यह सबसे अहम सवाल है। उपलब्ध लागत संबंधी आंकड़ों के मुताबिक, ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन प्राकृतिक गैस की तुलना में महंगा पड़ सकता है। इसे तैयार करने की लागत, इस्तेमाल होने वाली तकनीक और आपूर्ति व्यवस्था के खर्च का असर अंतिम कीमत पर पड़ सकता है। हालांकि, केवल उत्पादन लागत के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि उपभोक्ताओं के लिए PNG महंगी होगी या सस्ती। इसके लिए ब्लेंडिंग का अनुपात, गैस की खरीद कीमत, वितरण का खर्च और सरकार की नीतियां भी मायने रखेंगी। अगर अतिरिक्त लागत उपभोक्ताओं तक पहुंचती है, तो रसोई का बजट बढ़ सकता है। वहीं, कीमतों में राहत मिलने का दावा करने से पहले सरकार और संबंधित नियामक की अंतिम नीति का इंतजार करना जरूरी है।

सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती, कब तक लागू हो सकती है योजना?

हाइड्रोजन अत्यधिक ज्वलनशील गैस है। इसलिए इसे मौजूदा प्राकृतिक गैस नेटवर्क में मिलाने से पहले पाइपलाइन, उपकरणों और घरेलू गैस कनेक्शनों की सुरक्षा की जांच जरूरी होगी। हाइड्रोजन की मौजूदगी से कुछ सामग्रियों और उपकरणों के व्यवहार में बदलाव आ सकता है। इसी वजह से तकनीकी मानकों, परिचालन व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ी मंजूरियों पर विशेष ध्यान देना होगा। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद भी इसे लागू करने में समय लग सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस प्रक्रिया में दो से तीन साल तक लगने की संभावना जताई गई है, हालांकि इसकी अंतिम समयसीमा तय नहीं है। फिलहाल PNG उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। यह योजना अभी प्रस्ताव के स्तर पर है और गैस की कीमतों या घरेलू कनेक्शन में बदलाव को लेकर कोई अंतिम फैसला सामने आने के बाद ही स्थिति साफ होगी।

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