पाकिस्तान से अल्पसंख्यकों पर जुल्म और ज्यादती की एक बेहद डरावनी और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। देश के पंजाब प्रांत में एक बार फिर धार्मिक उन्माद और भीड़तंत्र का नंगा नाच देखने को मिला है, जहां मामूली विवाद के बाद आक्रोशित भीड़ ने ईसाई समुदाय के एक व्यक्ति के घर और दुकान को आग के हवाले कर दिया। इस खौफनाक घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि करीब 35 से अधिक ईसाई परिवारों को अपने पुश्तैनी आशियाने और गांव को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा है।
मामूली बात पर भड़की हिंसा और आगजनी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के एक ग्रामीण इलाके की है। बताया जा रहा है कि किसी स्थानीय मुद्दे या गलतफहमी को लेकर मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों और एक ईसाई व्यक्ति के बीच विवाद शुरू हुआ था। देखते ही देखते बात इतनी बढ़ गई कि वहां उग्र भीड़ जमा हो गई। कानून को ताक पर रखकर इस भीड़ ने ईसाई शख्स के घर और उसकी आजीविका का एकमात्र साधन यानी दुकान पर हमला बोल दिया। आरोप है कि भीड़ ने न केवल तोड़फोड़ की, बल्कि दोनों जगहों पर आग लगा दी, जिससे देखते ही देखते सब कुछ जलकर खाक हो गया।
न्याय मांगने पर पीड़ित पर ही पुलिसिया शिकंजा
इस दर्दनाक घटना का सबसे चौंकाने वाला और हैरान कर देने वाला पहलू यह है कि पुलिस प्रशासन का रवैया पूरी तरह से एकतरफा और पक्षपातपूर्ण रहा। जहां एक तरफ कानून के रखवालों को हमलावर भीड़ के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए थी, वहीं पुलिस ने उल्टे पीड़ित ईसाई शख्स को ही गिरफ्तार कर लिया। इस अन्यायपूर्ण कार्रवाई के बाद स्थानीय ईसाई समुदाय में भारी आक्रोश और असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है। लोगों का कहना है कि जब पीड़ित को ही न्याय मिलने के बजाय जेल में डाल दिया जाए, तो कमजोर वर्ग के लोग किससे मदद की गुहार लगाएं।
35 परिवारों का पलायन और खौफ का साया
इस भीषण हिंसा और आगजनी के बाद इलाके में इतना अधिक डर फैल गया है कि 35 से ज्यादा ईसाई परिवारों ने अपने घरों को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया है। अपनी जान और इज्जत बचाने के लिए ये परिवार रातोंरात अपना सब कुछ छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की तरफ भागने को मजबूर हो गए। इन परिवारों के पास न तो खाने का ठिकाना है और न ही सिर छुपाने की ढंग की छत। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की आंखों में सिर्फ दहशत और लाचारी साफ तौर पर देखी जा सकती है। मानवीय अधिकारों की रक्षा करने का दावा करने वाले देश में इस तरह का पलायन व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर फिर उठे गंभीर सवाल
पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों (विशेषकर हिंदू और ईसाई समुदाय) के खिलाफ हिंसा, जबरन धर्मांतरण और हमलों की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन हालिया मामला एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों की स्थिति की पोल खोल रहा है। स्थानीय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। हालांकि, प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई ठोस आश्वस्ति या सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाए गए हैं, जिससे पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का भविष्य और अधिक अंधकारमय नजर आ रहा है।
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