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CJP नेताओं के बॉन्ड पर क्यों मचा विवाद? क्या अब नहीं कर पाएंगे प्रदर्शन, पार्टी ने बयान जारी कर बताया सच

CJP नेताओं की रिहाई के बाद बॉन्ड को लेकर विवाद बढ़ा। क्या सौरव दास, अभिजीत दीपके और आशुतोष रांका अब प्रदर्शन नहीं कर सकेंगे? जानिए पार्टी ने क्या सफाई दी।

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CJP के नेताओं सौरव दास, अभिजीत दीपके और आशुतोष रांका को हिरासत से रिहा किए जाने के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। चर्चा हो रही है कि क्या अब ये नेता आगे किसी प्रदर्शन या आंदोलन में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। दरअसल, रिहाई के बाद अदालत में शांति भंग नहीं करने से संबंधित बॉन्ड भरे जाने की जानकारी सामने आई, जिसके बाद कई तरह के दावे किए जाने लगे। अब इन दावों पर CJP ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। पार्टी का कहना है कि उसके किसी भी नेता ने ऐसा कोई बॉन्ड नहीं भरा है, जिसमें भविष्य में विरोध प्रदर्शन नहीं करने की शर्त रखी गई हो। CJP के मुताबिक, शांति बनाए रखने की बात और शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर रोक लगाने की बात अलग-अलग हैं। पार्टी ने शांतिपूर्ण विरोध को संवैधानिक अधिकार बताते हुए प्रदर्शन बंद करने से जुड़े दावों का खंडन किया है।

बॉन्ड में क्या लिखा था और CJP ने क्या कहा?

CJP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट के जरिए स्पष्ट किया कि उसके नेताओं ने विरोध प्रदर्शन नहीं करने का कोई वादा नहीं किया है। पार्टी के अनुसार, बॉन्ड में शांति भंग नहीं करने से जुड़ी बात थी, न कि आंदोलन या प्रदर्शन से दूर रहने की शर्त। इसी वजह से रिहाई के बाद लगाए जा रहे प्रतिबंधों के दावों पर पार्टी ने सवाल उठाए हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने सौरव दास, अभिजीत दीपके और आशुतोष रांका को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया था। इसके बाद उन्हें हिरासत से रिहा कर दिया गया। बॉन्ड की शर्तों को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि, वास्तविक शर्तों और उनके कानूनी प्रभाव को समझने के लिए बॉन्ड के दस्तावेज तथा संबंधित अदालती आदेश देखना जरूरी है। फिलहाल CJP का स्पष्ट कहना है कि रिहाई का मतलब शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार छोड़ना नहीं है।

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रिहाई के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस

हिरासत से बाहर आने के बाद सौरव दास, अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह समेत अन्य लोगों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने हिरासत में लिए जाने की परिस्थितियों का जिक्र किया और दिल्ली पुलिस तथा केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। सौरव दास ने मौलिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए, जबकि आशुतोष रांका ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। CJP की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह ने कहा कि विरोध प्रदर्शन जारी है और हिरासत के बाद बॉन्ड भरवाना निवारक कार्रवाई की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा बताया। उनके मुताबिक, ऐसी कार्रवाई के दौरान संबंधित लोगों से शांति बनाए रखने का बॉन्ड लिया जाता है। इस पूरे मामले में अब सबसे अहम सवाल यही है कि बॉन्ड की वास्तविक शर्तें क्या हैं और उनका आगे होने वाले प्रदर्शनों पर कोई असर पड़ेगा या नहीं। CJP ने फिलहाल प्रदर्शन बंद करने संबंधी दावों को खारिज किया है।

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