त्योहारों के सीजन में चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। घरेलू बाजार में चीनी के दाम करीब 19 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमतों में तेजी देखी जा रही है। पिछले साल के मुकाबले इस साल चीनी करीब 20 फीसदी तक महंगी बताई जा रही है। अगर यह तेजी आगे भी जारी रहती है तो मिठाई, बेकरी और दूसरे खाद्य उत्पादों की लागत पर भी इसका असर पड़ सकता है।
चीनी कंपनियों के शेयरों में भी तेज उछाल
चीनी की कीमतों में तेजी का असर शुगर कंपनियों के शेयरों पर भी दिखाई दे रहा है। कई कंपनियों के शेयर में करीब 4 से 9 फीसदी तक की तेजी दर्ज की गई। बजाज हिंदुस्तान शुगर में 6.92 फीसदी, श्री रेणुका शुगर में 4.50 फीसदी और डालमिया भारत शुगर में 5.93 फीसदी की बढ़त रही। वहीं धामपुर शुगर मिल्स का शेयर 6.82 फीसदी और अवध शुगर्स एंड एनर्जी में 3.59 फीसदी ऊपर रहा। आंध्रा शुगर्स में 2.98 फीसदी और उत्तम शुगर मिल्स में 2.27 फीसदी की तेजी देखी गई।
उत्पादन घटा तो बढ़ने लगी कीमतों की चिंता
चीनी के दाम बढ़ने की सबसे बड़ी वजह उत्पादन में कमी को बताया जा रहा है। आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में इस बार उत्पादन प्रभावित हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इन राज्यों में चीनी उत्पादन करीब 280 से 290 लाख टन के आसपास रहने का अनुमान है। यह मात्रा देश की खपत के करीब बताई जा रही है। ऐसे में बाजार में मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ने पर कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
एथेनॉल के लिए चीनी के इस्तेमाल पर लग सकती है रोक
कीमतों में तेजी को नियंत्रित करने के लिए सरकार चीनी के डायवर्जन को लेकर कदम उठा सकती है। इसमें एथेनॉल बनाने के लिए चीनी के इस्तेमाल को सीमित या रोकने की योजना पर विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों में आगे होने वाली तेजी को रोकना है। अगर उत्पादन और आपूर्ति को लेकर दबाव बना रहा तो आने वाले दिनों में चीनी की कीमतों पर नजर रखना आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ कारोबारियों के लिए भी जरूरी होगा।
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