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मोदी के BRICS समिट में बड़ा फैसला, जंग के खिलाफ एकजुट हुए देश लेकिन नाम लेने से क्यों बच रहे?

BRICS Summit में साझा घोषणापत्र पर सहमति बन गई है। युद्ध की निंदा होगी, लेकिन किसी देश का नाम नहीं लिया जाएगा। पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की मुलाकात समेत पूरी खबर पढ़ें।

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 BRICS Summit 2026: भारत की मेजबानी में शनिवार से नई दिल्ली में दो दिवसीय BRICS शिखर सम्मेलन शुरू हो गया है। इस बैठक में रूस, चीन और ब्राजील समेत समूह के अन्य सदस्य देशों के प्रमुख और प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। समिट के दौरान साझा घोषणापत्र को लेकर महत्वपूर्ण सहमति बनने की खबर सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, सदस्य देश एकतरफा युद्ध और सैन्य कार्रवाई की निंदा करने पर सहमत हो गए हैं, लेकिन घोषणापत्र में किसी विशेष देश का नाम लेने से बचा जाएगा। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच BRICS किस तरह का संदेश देता है। साझा घोषणापत्र शनिवार शाम करीब 4 बजे जारी किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

साझा घोषणापत्र पर बनी सहमति

भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस शिखर सम्मेलन में ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, ईरान, इंडोनेशिया, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) समेत BRICS के सदस्य देश शामिल हैं। बैठक का एक प्रमुख उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच साझा रुख तैयार करना है। इस बार पश्चिम एशिया का संघर्ष और क्षेत्रीय तनाव चर्चा के महत्वपूर्ण विषयों में शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, घोषणापत्र में युद्ध और एकतरफा सैन्य कार्रवाई के खिलाफ बात रखी जाएगी, लेकिन किसी देश को सीधे निशाना नहीं बनाया जाएगा। यह फैसला इसलिए अहम है क्योंकि BRICS में अलग-अलग राजनीतिक और रणनीतिक हित रखने वाले देश शामिल हैं। सभी देशों के बीच सहमति बनाना आसान नहीं होता। इसके बावजूद साझा बयान पर सहमति बनने को सम्मेलन की बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। अब सबकी निगाहें अंतिम घोषणापत्र पर टिकी हैं।

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 ईरान और UAE के बीच तनाव कम करने की कोशिश

BRICS सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों के प्रतिनिधि ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मतभेद कम करने की कोशिश भी कर रहे हैं। खाड़ी क्षेत्र में शुरू हुए संघर्ष के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ा है। ऐसे समय में BRICS के मंच पर बातचीत और आपसी समझ को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। सदस्य देश चाहते हैं कि क्षेत्रीय विवादों का असर संगठन की एकता और साझा फैसलों पर न पड़े। ईरान और UAE दोनों BRICS के सदस्य हैं, इसलिए उनके बीच बेहतर संवाद समूह के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सम्मेलन में आर्थिक सहयोग के साथ-साथ सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय शांति से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है। इस घटनाक्रम से साफ है कि BRICS अब केवल व्यापार और आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वैश्विक चुनौतियों पर भी अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

ईरानी राष्ट्रपति का अमेरिका और इजराइल को कड़ा संदेश

BRICS समिट में हिस्सा लेने के लिए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान शुक्रवार सुबह नई दिल्ली पहुंचे। अपनी तीन दिवसीय भारत यात्रा के दौरान उन्होंने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान का रुख स्पष्ट किया। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि उनका देश दबाव, दादागीरी और अहंकार के सामने झुकने वाला नहीं है। पेजेश्कियान ने ईरान के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने और विदेशी ताकतों की ओर से समाज में मतभेद पैदा करने की कोशिशों का मुकाबला करने की बात कही। उन्होंने शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के प्रति प्रतिबद्धता भी जताई। ईरानी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान के संबंधों में तनाव बना हुआ है। उनके संदेश से यह संकेत मिलता है कि तेहरान अपनी सुरक्षा और विदेश नीति के मुद्दों पर सख्त रुख बनाए रखना चाहता है।

 पीएम मोदी से मुलाकात में सुरक्षित नौवहन पर जोर

ईरानी राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं के अलावा पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने सुरक्षित नौवहन और नाविकों की सुरक्षा को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने क्षेत्रीय संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से निकालने पर जोर दिया। दोनों नेताओं की यह मुलाकात दो हफ्ते से भी कम समय में दूसरी बैठक बताई जा रही है। भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक संबंध हैं तथा व्यापार, संपर्क और क्षेत्रीय सहयोग जैसे मुद्दे दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत ने इस साल 1 जनवरी को चौथी बार BRICS की अध्यक्षता संभाली है। वर्ष 2026 में संगठन अपनी स्थापना के 20 वर्ष पूरे कर रहा है। ऐसे में नई दिल्ली में हो रहा यह सम्मेलन भारत के लिए वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक भूमिका मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।

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