उत्तर प्रदेश के महोबा में मुस्लिम समाज ने सामाजिक कुरीतियों और फिजूलखर्ची को कम करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। चरखारी कस्बे के मोहल्ला मड़वासन स्थित मदरसा मुहम्मदिया अरबिया में हुई बैठक में तीजा और चालीसवां के मौके पर होने वाले आवामी खाने यानी सामूहिक मृत्यु भोज को बंद करने पर सहमति बनी। बैठक हाफिज आबिद हुसैन की पहल पर आयोजित की गई थी, जिसमें नगर के काजी, हाफिज और समाज के कई जिम्मेदार लोग शामिल हुए।
अब सिर्फ फातिहा करने पर जोर
बैठक में तय किया गया कि किसी व्यक्ति के इंतकाल के बाद तीजा और चालीसवां के मौके पर अब सामूहिक रूप से खाना नहीं खिलाया जाएगा। इन मौकों पर मुख्य रूप से फातिहा का आयोजन किया जाएगा। हालांकि, घर के सदस्यों और दूर से आने वाले रिश्तेदारों के लिए भोजन की व्यवस्था की जा सकेगी। इसके अलावा जरूरतमंद, गरीब और बेसहारा लोगों को खाना खिलाने की भी अनुमति रहेगी। समाज के लोगों का मानना है कि इस फैसले से परिवारों पर होने वाला अतिरिक्त खर्च कम होगा।
भोज के पैसे का ऐसे इस्तेमाल करने की सलाह
बैठक में यह भी कहा गया कि मृत्यु के बाद सामूहिक भोज पर खर्च होने वाली रकम को बेहतर कामों में लगाया जा सकता है। समाज के लोगों को सलाह दी गई कि इस पैसे का इस्तेमाल मस्जिद, मदरसा, ईदगाह या किसी गरीब और जरूरतमंद परिवार की मदद के लिए किया जाए। उनका कहना है कि इससे मरहूम के लिए सवाब का काम भी किया जा सकता है और जरूरतमंद लोगों को सीधे मदद मिल सकती है। फातिहा के बाद तबर्रुक के तौर पर जर्दा बनाकर लोगों में बांटने की छूट भी रखी गई है।
नियम तोड़ा तो सामाजिक बहिष्कार का फैसला
बैठक में इस फैसले को लेकर सख्ती भी दिखाई गई। तय किया गया कि अगर कोई व्यक्ति सामूहिक आवामी खाना करवाता है तो उसके खिलाफ सामाजिक स्तर पर कार्रवाई की जाएगी। ऐसे व्यक्ति के घर नगर का कोई हाफिज फातिहा पढ़ने नहीं जाएगा और समाज की ओर से उसका बहिष्कार किया जाएगा। महोबा के चरखारी में लिया गया यह फैसला अब चर्चा में है। समाज के जिम्मेदार लोगों ने इसे फिजूलखर्ची रोकने और जरूरतमंदों की मदद को बढ़ावा देने वाला कदम बताया है।
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