कुरुक्षेत्र के एक अस्पताल में 71 वर्षीय जुगल किशोर की मौत के बाद सामने आई घटना ने हर किसी को हैरान कर दिया। जुगल किशोर करीब 10 साल से पिहोवा के सरस्वती तीर्थ इलाके में रह रहे थे। उनकी शादी नहीं हुई थी और परिवार में उनकी छोटी बहन पुष्पा रानी के बारे में ही जानकारी थी। करीब दो सप्ताह पहले तबीयत बिगड़ने पर आश्रम के संचालक बाबा निशान सिंह उन्हें इलाज के लिए अस्पताल लेकर गए थे। हालत गंभीर होने पर उन्हें कुरुक्षेत्र के LNJP अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 4 सितंबर को उनकी मौत हो गई।
आखिरी बार देखने आई बहन, लेकिन संस्कार से किया इनकार
जुगल की मौत की जानकारी मिलने के बाद काफी कोशिशों से उनकी बहन पुष्पा रानी से संपर्क हुआ। वह अस्पताल पहुंचीं और भाई का शव देखा। इसके बाद बाबा निशान सिंह ने उनसे अंतिम संस्कार में शामिल होने की बात कही। आरोप है कि पुष्पा ने अपनी तबीयत ठीक नहीं होने और समय नहीं होने की बात कहते हुए वहां रुकने से इनकार कर दिया। उन्होंने अंतिम संस्कार और अस्थि विसर्जन की जिम्मेदारी भी आश्रम को सौंप दी। इसके बाद वह एक रिश्तेदार के साथ अस्पताल से चली गईं।
आश्रम ने निभाई भाई की आखिरी जिम्मेदारी
बहन के चले जाने के बाद बाबा निशान सिंह और आश्रम कमेटी ने जुगल किशोर के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई। शव को पिहोवा लाया गया और विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया गया। इसके बाद उनकी अस्थियों को सरस्वती नदी में प्रवाहित किया गया। बाबा निशान सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम पर दुख जताते हुए कहा कि भाई-बहन के रिश्ते की ऐसी स्थिति देखकर उन्हें काफी पीड़ा हुई। इस घटना से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोग परिवार और रिश्तों को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
आश्रम में 30 से ज्यादा बेसहारा लोगों की सेवा
बाबा निशान सिंह के आश्रम में फिलहाल 30 से अधिक बेघर और जरूरतमंद लोग रहते हैं। इनमें बच्चे, बुजुर्ग, दिव्यांग और बीमार लोग शामिल हैं। आश्रम की देखरेख और निर्माण का काम लगातार चल रहा है। बाबा निशान सिंह के परिवार के सदस्य भी इसमें सहयोग करते हैं। वहीं कुछ लोगों की मदद से आश्रम की जरूरतें पूरी की जा रही हैं। जुगल किशोर के मामले में भी आखिरकार इसी आश्रम ने वह जिम्मेदारी निभाई, जो आमतौर पर परिवार के करीबी लोग निभाते हैं।
