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बेटी के रेप-मर्डर के बाद राजनीति में आईं मां, अब आरजी कर की जांच पर उठाए गंभीर सवाल

RG Kar रेप-मर्डर केस में पीड़िता की मां और भाजपा विधायक रत्ना देबनाथ ने CBI जांच की प्रगति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार बदलने के बावजूद न्याय की प्रक्रिया में अपेक्षित तेजी नहीं दिख रही है।

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कोलकाता के चर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप और हत्या मामले में पीड़िता की मां तथा पनिहाटी से भाजपा विधायक रत्ना देबनाथ ने जांच की प्रगति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। बैरकपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार बदलने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि न्याय की प्रक्रिया तेज होगी, लेकिन अब तक उन्हें ऐसा होता नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा कि मामले में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है और परिवार अब भी इंसाफ का इंतजार कर रहा है। रत्ना देबनाथ के अनुसार, केवल राजनीतिक बदलाव से स्थिति नहीं बदलती, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में ठोस परिणाम दिखाई देने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बेटी को न्याय दिलाने की लड़ाई अभी अधूरी है और परिवार लगातार इस मामले पर नजर बनाए हुए है।

‘राजनीति में आने का फैसला आसान नहीं था’

रत्ना देबनाथ ने कहा कि उनकी बेटी की दर्दनाक मौत के बाद परिवार का राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने बताया कि उनके पति का अपना कारोबार था और परिवार सामान्य जीवन जी रहा था। यहां तक कि उनकी बेटी भी नहीं चाहती थी कि परिवार राजनीति में आए। लेकिन घटना के बाद उन्हें लगा कि राज्य में स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवाल उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 9 अगस्त 2024 को आरजी कर अस्पताल में हुई घटना ने कई व्यवस्थागत खामियों को उजागर किया। इसी कारण उन्होंने सार्वजनिक जीवन में आने का फैसला किया, ताकि ऐसे मुद्दों को मजबूती से उठाया जा सके। उनका कहना है कि यह फैसला किसी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के कारण नहीं बल्कि अपनी बेटी के लिए न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए लिया गया।

आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर भी उठाए सवाल

भाजपा विधायक ने जांच एजेंसियों के रवैये पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति पर गंभीर आरोप हैं तो उसके पेशे या पद के आधार पर अलग व्यवहार नहीं होना चाहिए। रत्ना देबनाथ ने कहा कि उनकी बेटी भी डॉक्टर थी, लेकिन वह अपराध की शिकार हुई। ऐसे में यदि किसी डॉक्टर पर अपराध में शामिल होने का आरोप है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं हो सकती। उन्होंने अदालत द्वारा गठित नई विशेष जांच टीम (SIT) के गठन का भी जिक्र किया और उम्मीद जताई कि इससे मामले की जांच में नई दिशा मिलेगी। रत्ना देबनाथ का कहना है कि परिवार की एकमात्र मांग है कि मामले के सभी दोषियों की पहचान हो और उन्हें कानून के मुताबिक सजा मिले।

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