कौशांबी के मनौरी में पटाखा फैक्ट्री में हुए जानलेवा विस्फोट के बाद पुलिस विभाग ने जिम्मेदार कर्मचारियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। मामले में प्रयागराज रेंज के आईजी अजय मिश्र ने एक इंस्पेक्टर और छह सब-इंस्पेक्टर को निलंबित किया है। इसके साथ ही पिपरी थाने के प्रभारी विकास सिंह को लाइन हाजिर किया गया है। चायल चौकी के मौजूदा और पूर्व प्रभारियों पर भी कार्रवाई की गई है। बीट पर तैनात जितेंद्र कुमार और कृष्ण कुमार को भी सस्पेंड कर दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, पुलिसकर्मियों पर फैक्ट्री के संचालन की जानकारी होने के बावजूद जरूरी कार्रवाई नहीं करने और अपने कर्तव्य में लापरवाही के आरोप हैं।
मुख्य आरोपी नौशाद पुलिस की गिरफ्त में
विस्फोट के बाद फरार चल रहे मामले के मुख्य आरोपी नौशाद को भी पुलिस ने पकड़ लिया है। पुलिस को उसके बारे में सूचना मिली थी कि वह चरवा इलाके में तेरामिल के पास से निकलने की कोशिश कर रहा है। इसके बाद एसओजी और स्थानीय पुलिस ने इलाके में घेराबंदी की। पुलिस का कहना है कि पकड़े जाने के डर से नौशाद ने टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी गोलीबारी हुई। इस दौरान उसके पैर में गोली लगी और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से हथियार और कारतूस मिलने की बात कही गई है। घायल होने के कारण उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मामले में उसके परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
एक धमाके ने उजाड़ दिए कई परिवार
मनौरी में सोमवार सुबह करीब 11 बजे हुए विस्फोट ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। पटाखों में हुए धमाके की ताकत इतनी ज्यादा थी कि आसपास मौजूद कई मकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और कुछ घर पूरी तरह ढह गए। हादसे में अब तक 11 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि छह लोग घायल हैं। घायलों को प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल में इलाज के लिए भेजा गया है। घटना के बाद पुलिस, प्रशासन और बचाव दल ने मलबे को हटाकर लोगों की तलाश शुरू की। हादसे की भयावहता को देखते हुए इलाके में काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल रहा।
मुआवजे का ऐलान, प्रशासन से सांसद ने पूछा बड़ा सवाल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर दुख जताते हुए मृतकों के परिवारों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। उन्होंने घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं। दूसरी तरफ सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने घटनास्थल पर पहुंचकर प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि घनी आबादी के बीच इतनी बड़ी पटाखा फैक्ट्री चल रही थी तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि फैक्ट्री के संचालन की अनुमति किस स्तर पर मिली और हादसे के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी। अब पुलिसकर्मियों पर हुई कार्रवाई के बाद जांच की दिशा इस बात पर भी है कि फैक्ट्री का संचालन लंबे समय तक कैसे चलता रहा और इसकी निगरानी में कहां चूक हुई।
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