उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में इन दिनों आस्था और अनोखेपन का एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने हर किसी को अचंभित कर दिया। सोरोंजी के प्रसिद्ध लहरा गंगाघाट पर एक ऐसी विशाल कांवड़ पहुंची, जिसकी लंबाई और बनावट देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें खुली की खुली रह गईं। फिरोजाबाद जिले के गांव नाउआ से आए लगभग 40 शिवभक्तों के इस जत्थे ने 131 मीटर लंबी हनुमान जी की पूंछ वाली कांवड़ तैयार की थी। इस अनोखी यात्रा को देखने के लिए गंगाघाट और आसपास के रास्तों पर भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा, जो इस भव्य दृश्य को अपने कैमरे में कैद करने के लिए उत्सुक नजर आया।
वानर सेना के रूप में साथ चले कांवड़िए
इस धार्मिक यात्रा को खास बनाने के लिए शिवभक्तों ने पौराणिक कथाओं के विभिन्न पात्रों का जीवंत रूप धारण किया था। बॉबी निंगुआ ने हनुमान जी का भव्य स्वरूप धरा, जिनके पीछे उनकी 131 मीटर लंबी पूंछ फैली हुई थी और उसमें पवित्र गंगाजल भरा हुआ था। इस लंबी और भारी पूंछ को संभालने की जिम्मेदारी उनके 40 साथियों ने उठाई, जो भगवान राम की वानर सेना के रूप में आगे बढ़ रहे थे। इसके अलावा, जत्थे में शामिल नथुनी प्रसाद ने भगवान शिव और उदय ने जामवंत का रूप धारण किया। इन सभी सजीव रूपों ने मिलकर इस कांवड़ यात्रा को एक अलौकिक और भव्य रूप दे दिया, जिससे पूरा मार्ग भक्तिमय हो गया।
जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत और गूंजे जयकारे
गंगाघाट से विधि-विधान से पूजा-अर्चना और स्नान करने के बाद यह विशाल कांवड़ जत्था सोरोंजी, प्रहलादपुर, गोराहा, भिटौना और कासगंज होते हुए अपने गंतव्य फिरोजाबाद के लिए रवाना हुआ। रास्ते में पड़ने वाले हर गांव और कस्बे में स्थानीय लोगों ने इस अनूठी कांवड़ का दिल खोलकर स्वागत किया। जगह-जगह पुष्प वर्षा की गई और पूरा यात्रा मार्ग ‘बम-बम भोले’ तथा ‘जय बजरंगबली’ के जयकारों से गूंज उठा। इस अद्भुत कांवड़ को अपनी आंखों से देखने के लिए राजमार्ग पर लोगों का तांता लगा रहा, और हर कोई इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनना चाहता था।
कुछ अलग करने की चाहत में बनी यह अनूठी थीम
हनुमान जी का स्वरूप धारण करने वाले मुख्य कांवड़िए बॉबी निंगुआ ने बताया कि वे पहली बार सोरोंजी के लहरा गंगाघाट से गंगाजल लेने पहुंचे थे। उनकी इच्छा थी कि इस बार उनकी कांवड़ सबसे हटकर और यूनिक हो, ताकि लोग शिव भक्ति के साथ-साथ हमारी प्राचीन संस्कृति और पौराणिक पात्रों से भी जुड़ाव महसूस कर सकें। इसी अनोखे विचार के चलते उन्होंने हनुमान जी की पूंछ वाली थीम पर इस विशाल कांवड़ को तैयार करने का मन बनाया। उनकी यह मेहनत और अनूठी सोच पूरी यात्रा के दौरान क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी रही और सोशल मीडिया पर भी यह खबर तेजी से वायरल हो रही है।
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