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MP में कुदरत का करिश्मा: जन्म लेते ही चर्चा में आया 4 हाथ और 4 पैर वाला बच्चा, देखने वालों की उमड़ी भीड़

MP के छतरपुर में जन्मा चार हाथ और चार पैरों वाला अनोखा बच्चा! जानिए क्या है इस दुर्लभ मेडिकल घटना का कारण और डॉक्टरों की क्या है राय।

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MP के छतरपुर जिले से एक बेहद हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। लवकुशनगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक महिला ने ऐसे अनोखे बच्चे को जन्म दिया है, जिसके शरीर पर सामान्य बच्चों की तुलना में अतिरिक्त अंग यानी चार हाथ और चार पैर हैं। इस घटना के सामने आते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और अस्पताल परिसर में भारी भीड़ जुट गई। नवजात का वजन जन्म के समय लगभग 3 किलोग्राम था और फिलहाल जज्जा-बच्चा दोनों डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में हैं।

क्यों होती है ऐसी दुर्लभ स्थिति? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

इस पूरे मामले पर अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद महिला डॉक्टर ने स्पष्ट किया है कि ऐसे केस वास्तव में लाखों में एक होते हैं। मेडिकल साइंस की भाषा में इसे कंजेंनिटल एनोमली या कंज्वॉइनिंग का एक रूप माना जाता है। जब गर्भ में जुड़वां बच्चे पल रहे होते हैं और किसी कारणवश दूसरा भ्रूण पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता, तब वह अधूरा भ्रूण मुख्य बच्चे के शरीर से जुड़ जाता है। इसी प्रक्रिया के कारण नवजात के शरीर पर अतिरिक्त हाथ और पैर नजर आते हैं। डॉक्टर अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि सर्जरी के जरिए इन अतिरिक्त अंगों को सुरक्षित रूप से अलग किया जा सकता है या नहीं।

मध्य प्रदेश में पहले भी आ चुके हैं ऐसे हैरान करने वाले मामले

छतरपुर की यह घटना भले ही चर्चा का विषय बनी हो, लेकिन मध्य प्रदेश में इस तरह के दुर्लभ मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। कुछ समय पहले खंडवा जिले में एक ऐसा बच्चा पैदा हुआ था जिसके चार हाथ, चार पैरों के साथ-साथ चार कान भी थे। हालांकि, जन्म के कुछ ही देर बाद उसकी मृत्यु हो गई थी। इसके अलावा विदिशा और इंदौर में भी इस प्रकार के शारीरिक विकास से जुड़े अलग-अलग और दुर्लभ मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जहां नवजात शिशुओं में अतिरिक्त अंग या दो सिर जैसी स्थितियां पाई गई थीं।

बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर करने की तैयारी

वर्तमान में लवकुशनगर के अस्पताल में स्थानीय लोग लगातार बच्चे की एक झलक पाने के लिए पहुंच रहे हैं, जिससे अस्पताल प्रशासन को भी भीड़ नियंत्रित करने में मशक्कत करनी पड़ रही है। डॉक्टरों की टीम लगातार नवजात की सेहत पर पैनी नजर रखे हुए है। बच्चे की जटिल शारीरिक स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर और उच्च स्तरीय चिकित्सा देखभाल के लिए जिला अस्पताल या किसी बड़े मेडिकल कॉलेज भेजने की पूरी तैयारी की जा रही है, ताकि विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में आगे का निर्णय लिया जा सके।

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