उत्तर प्रदेश के गोंडा में पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने बाबा रामदेव को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिस पर सियासी चर्चा तेज हो सकती है। एक कार्यक्रम में पहुंचे बृजभूषण ने रामदेव के आंदोलन और उनके स्वदेशी अभियान पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि अगर बाबा रामदेव आंदोलन कर रहे हैं तो इस बार उन्हें आर-पार की लड़ाई लड़नी चाहिए। उनके बयान में रामदेव के पुराने आंदोलनों और स्वदेशी से जुड़े दावों पर भी निशाना साधा गया।
‘इस बार आर-पार की लड़ाई लड़ें बाबा रामदेव’
बृजभूषण शरण सिंह ने व्यंग्य करते हुए कहा कि बाबा रामदेव को इस बार आंदोलन के दौरान सिंदूर, टिकुली और सलवार जैसी चीजें नहीं पहननी चाहिए, बल्कि खुलकर लड़ाई लड़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि रामदेव की शुरुआत स्वदेशी अभियान के नाम पर हुई थी, इसलिए उन्हें नकली और मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। बृजभूषण ने रामदेव के स्वदेशी अभियान पर सवाल उठाते हुए यहां तक कहा कि देश में नकली घी के बढ़ते चलन के लिए भी रामदेव को जिम्मेदार माना जाना चाहिए। हालांकि, उनके इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
खाद्य पदार्थों पर बैन को लेकर सरकार पर भी सवाल
बृजभूषण शरण सिंह गोंडा के रघुकुल विद्यापीठ में आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में पहुंचे थे। यहां उन्होंने पांच ब्लॉक से आए एक हजार से ज्यादा मेधावी छात्रों को मेडल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मिलावटी खाद्य पदार्थों को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि नकली तेल, घी और दूसरे खाद्य पदार्थों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। उनके मुताबिक, उन्होंने करीब 20 साल से इस मुद्दे को उठाया, लेकिन उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने दावा किया कि दूध की उपलब्धता और उसकी खपत के आंकड़ों में बड़ा अंतर है। बृजभूषण ने कहा कि अगर अब सरकार ने कुछ खाद्य पदार्थों पर प्रतिबंध लगाया है तो यह अच्छी बात है, लेकिन कार्रवाई में इतनी देर क्यों हुई, यह सवाल जरूर उठता है।
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