छात्रों के आंदोलन के दौरान दर्ज हुई FIR को रद्द करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखना संविधान से मिला अधिकार है। हालांकि, जिन मामलों में गंभीर आरोप हैं, उनकी जांच को लेकर भी कोर्ट ने सरकार से जानकारी मांगी है। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक हाई पावर्ड कमेटी बनाने का संकेत दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने मांगी FIR की पूरी लिस्ट
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर ने आंदोलन से जुड़े सभी मामलों की FIR रद्द करने की मांग की। सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को सामान्य राहत नहीं दी जानी चाहिए। वहीं, दूसरे पक्ष की ओर से कहा गया कि संसद मार्च गैरकानूनी था और FIR रद्द करने से गलत संदेश जा सकता है। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट सभी पहलुओं को ध्यान में रखेगा। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से संबंधित FIR की सूची देने को कहा है।
पूर्व जज की अध्यक्षता में बनेगी कमेटी
कोर्ट ने कहा कि मामले की पूरी तस्वीर समझने के लिए एक हाई पावर्ड कमेटी बनाई जाएगी। इसमें पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज के साथ पूर्व डीजीपी और पूर्व सीबीआई निदेशक को शामिल किए जाने की बात कही गई। CJI ने बताया कि इन लोगों से कमेटी में शामिल होने को लेकर सहमति ली जा चुकी है। वकीलों ने कमेटी में पूर्व अटॉर्नी जनरल और महिला सदस्य को भी शामिल करने का सुझाव दिया। कोर्ट ने सभी पक्षों से सुझाव देने को कहा है।
महिला प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठा
सुनवाई के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर मिल रही ऑनलाइन धमकियों का मुद्दा भी उठाया गया। एक वकील ने कहा कि ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, कुछ वकीलों ने प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित गलत व्यवहार करने वाले पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। CJI ने कहा कि कमेटी के सामने सभी पक्ष अपनी बात रख सकते हैं और हर पहलू पर विचार किया जाएगा।
कल आ सकता है कमेटी पर आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से उन मामलों की सूची भी मांगी है, जिनमें आगे जांच जारी रखना जरूरी है। सुनवाई के दौरान एक वकील ने दोनों पक्षों की ओर से नोडल वकील नियुक्त करने का सुझाव दिया, ताकि कमेटी और कोर्ट को मामले की जानकारी जुटाने में मदद मिल सके। CJI ने कहा कि यदि सभी पक्ष अपने सुझाव दे देते हैं तो कोर्ट अगले दिन कमेटी के गठन को लेकर आदेश देने का प्रयास करेगा। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश पर है।
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