संसद के मानसून सत्र का अगला सप्ताह काफी हंगामेदार हो सकता है। सरकार FCRA संशोधन बिल और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन बिल को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। इन दोनों बिलों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच पहले से ही मतभेद हैं। सरकार ने अपने सभी सांसदों से अगले सप्ताह सदन में मौजूद रहने को कहा है। वहीं कांग्रेस ने भी अपने सांसदों के लिए तीन दिनों की व्हिप जारी की है। यानी पार्टी के सांसदों को तय दिनों में सदन में मौजूद रहना होगा। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार इन दोनों बिलों को सदन में कैसे आगे बढ़ाती है और विपक्ष इसका किस तरह विरोध करता है।
FCRA बिल पर कांग्रेस का विरोध
FCRA यानी विदेशी चंदे से जुड़े नियमों में बदलाव वाला बिल सरकार के लिए अहम है। सरकार का कहना है कि विदेशी फंड से जुड़े नियमों को और मजबूत करने की जरूरत है। वहीं कांग्रेस इस बिल का विरोध कर रही है। विपक्ष की ओर से इसे संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC के पास भेजने की मांग भी सामने आ सकती है। सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर बातचीत से अभी कोई रास्ता नहीं निकला है। कांग्रेस की ओर से यह भी कहा जा रहा है कि सरकार को बिल में बदलाव के लिए तैयार होना चाहिए। दूसरी तरफ सरकारी सूत्रों का कहना है कि फिलहाल FCRA बिल में बड़े बदलाव की संभावना कम है। ऐसे में इस बिल पर संसद में जोरदार बहस देखने को मिल सकती है।
परिसीमन बिल पर DMK की भूमिका अहम
परिसीमन बिल को लेकर भी सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद हैं। इस बिल का संबंध भविष्य में लोकसभा सीटों के नए तरीके से बंटवारे से है। दक्षिण भारत के कई दलों को डर है कि इससे उनके राज्यों की राजनीतिक ताकत पर असर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार की नजर तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी DMK पर है। सरकार को उम्मीद है कि कुछ शर्तों के साथ DMK इस बिल का समर्थन कर सकती है। सरकार की ओर से लोकसभा सीटों में करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की बात कही गई है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने इस मुद्दे पर शनिवार को सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है। अब देखना होगा कि DMK इस बैठक में क्या रुख अपनाती है।
राहुल गांधी और सरकार के बीच बातचीत से नहीं निकला रास्ता
संसद में चल रहे गतिरोध को खत्म करने के लिए सरकार की ओर से बातचीत की कोशिश भी की गई है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से बातचीत की है। हालांकि, अभी तक दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाई है। कांग्रेस की एक बड़ी मांग है कि 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर हुई दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह सदन में बयान दें। सरकार का कहना है कि FCRA बिल पर चर्चा के दौरान अमित शाह ही जवाब देंगे। विपक्ष चाहता है कि सरकार किसी एक मुद्दे पर समझौता करे, जिससे दूसरे बिल को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो सके। अब सरकार अगले कुछ दिनों में तय करेगी कि FCRA बिल कब पेश किया जाए और परिसीमन बिल को इसी सत्र में लाया जाए या इसके लिए अलग से विशेष सत्र बुलाया जाए।
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