कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे और राज्य सरकार में मंत्री यतीन्द्र सिद्धारमैया ने हिंदू राष्ट्र को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसके बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। बीदर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि अगर भारत हिंदू राष्ट्र बनता है, तो इससे दमनकारी व्यवस्था फिर लौट सकती है। उन्होंने बिना किसी पार्टी का नाम लिए कहा कि कुछ सांप्रदायिक ताकतें धर्म का इस्तेमाल कर समाज को बांटने की कोशिश कर रही हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं।
धर्म के नाम पर राजनीति का लगाया आरोप
अपने संबोधन में यतीन्द्र सिद्धारमैया ने कहा कि समाज को एकजुट रखने के लिए सभी वर्गों को साथ लेकर चलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर धर्म का इस्तेमाल लोगों को दबाने या बांटने के लिए किया जाएगा, तो इसका विरोध होना चाहिए। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज के कमजोर वर्गों को आगे बढ़ाने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर काम करना जरूरी है। उनके बयान को लेकर अब राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
सामाजिक एकता पर दिया जोर
यतीन्द्र सिद्धारमैया ने अपने भाषण में कहा कि अगर समाज के सभी लोग मिलकर काम करेंगे, तभी सभी वर्गों का विकास संभव होगा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक ताकत तभी मजबूत होगी, जब हर वर्ग को बराबरी का अवसर मिलेगा। उन्होंने अपने पूर्वजों के विचारों का जिक्र करते हुए कहा कि समाज के कल्याण और समान अधिकारों के लिए लगातार प्रयास करना चाहिए। उनका कहना था कि सामाजिक न्याय और समानता लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है और इसे मजबूत बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
कौन हैं यतीन्द्र सिद्धारमैया?
यतीन्द्र सिद्धारमैया कर्नाटक के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे हैं। राजनीति में आने से पहले वह डॉक्टर के रूप में काम कर चुके हैं। साल 2018 में उन्होंने वरुणा विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। वर्तमान में वह कर्नाटक सरकार में शहरी विकास से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनके पास शहरी जल आपूर्ति, जल निकासी और कई विकास परियोजनाओं का कार्यभार भी है। उनके ताजा बयान के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस पर विभिन्न राजनीतिक दलों की क्या प्रतिक्रिया आती है।
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