Rahul Gandhi: लोकसभा में मानसून सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मोदी सरकार को नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था के मुद्दों पर जमकर घेरा। सदन में अपनी बात रखते हुए राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कहा कि छात्र हमेशा सच्चाई की तलाश में दौड़ता रहता है। उन्होंने महात्मा गांधी का हवाला देते हुए कहा कि हमारे घर की खिड़कियां सभी दिशाओं से आने वाली हवाओं के लिए खुली रहनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने देश के युवाओं और छात्रों के विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि उनका यह गुस्सा नफरत या हिंसा नहीं, बल्कि उनकी अपनी बात रखने की एक लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति थी, जिसका सभी राजनीतिक दलों को सम्मान करना चाहिए।
‘स्टूडेंट’ के मायने और सत्ता पक्ष की आपत्ति
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने सदन में एक वाकया साझा किया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने एक छात्रा से पूछा कि ‘स्टूडेंट’ होने का वास्तविक अर्थ क्या है, तो उस बच्ची ने बहुत ही सुंदर जवाब दिया था। छात्रा ने कहा कि छात्र वह व्यक्ति होता है, जिसका दिमाग हमेशा खुला रहता है और जो यह स्वीकार करता है कि वह संसार की हर बात नहीं जानता। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने जैसे ही अपनी बात के सिलसिले में आगे के शब्दों का इस्तेमाल करना शुरू किया, वैसे ही सत्ता पक्ष की बेंचों से जोरदार हंगामा शुरू हो गया। लोकसभा स्पीकर ने भी उन्हें टोकते हुए मुख्य विधेयक पर चर्चा करने का आग्रह किया।
किरेन रिजिजू की कड़ी आपत्ति और ‘अंधभक्त’ शब्द पर बवाल
हंगामे के बीच राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने छात्रों की मेहनत का जिक्र करते हुए एक ऐसा शब्द इस्तेमाल किया, जिससे संसद में सियासी पारा अचानक चढ़ गया। राहुल गांधी के बयानों पर आपत्ति जताते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने तुरंत कड़ा विरोध दर्ज कराया। किरेन रिजिजू ने सदन में कहा कि राहुल गांधी छात्रों के नाम की आड़ लेकर सदन में ऐसे शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं जो पूरी तरह से असंसदीय हैं। मंत्री ने मांग की कि इस तरह के अमर्यादित शब्दों को सदन की कार्यवाही से तुरंत हटाया जाना चाहिए। किरेन रिजिजू ने यह भी स्पष्ट किया कि सत्ता पक्ष के उत्तेजित होने की मुख्य वजह यही असंसदीय शब्दावली थी।
हंगामे के बाद थमा सदन का माहौल और बैठी कांग्रेस
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की तीखी आपत्ति और सदन में मचे भारी हंगामे के बाद माहौल काफी गरमा गया। मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि सदन चलाने के जो नियम तय किए गए हैं, वे किसी एक पक्ष ने नहीं बनाए हैं, बल्कि सभी के लिए समान हैं। इस तीखी नोकझोंक और बढ़ते हुए प्रतिरोध के बाद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने अपनी बात को आगे बढ़ाने के बजाय अपनी सीट पर वापस बैठना ही बेहतर समझा। संसद के इस आठवें दिन की कार्यवाही में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का यह संबोधन और उस पर हुआ यह तीखा राजनीतिक घमासान इस समय देश भर की सुर्खियों में छाया हुआ है।
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